सहारनपुर। जोन तीन की सुभाषनगर कॉलोनी के मकान संख्या 1/320 को नगर निगम द्वारा जीआईएस सर्वे आधारित 62,967 रुपये का बिल भेजा गया है। इसमें खास बात यह है कि मकान तक न तो नगर निगम की पेयजल की लाइन पहुंचती है और न ही सीवर लाइन।
इसके बावजूद बिल में 30,224 रुपये जलकर और 7,558 रुपये सीवर कर के जोड़े गए हैं। यह मात्र एक उदाहरण है। तमाम नागरिकों के बिलों में इस तरह की गड़बड़ियां हैं, जिन्हें दूर कराने के लिए नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
दरअसल, पहले घर-घर जाकर सर्वे के हिसाब से जलकर और गृहकर लगता था। अब कंप्यूटराइज मशीनों के जरिए जीआईएस सर्वे कराया गया, जिसके बाद नया टैक्स लग रहा है। जीआईएस सर्वे के बाद भवनों पर लगने वाला गृहकर एवं जलकर 100 गुणा तक बढ़ गया है। ऐसे काफी परिवार है, जिनके घरों का टैक्स पहले एक हजार रुपये से 1100 रुपये तक था, लेकिन अब उनको जो बिल भेजे गए हैं उनमें टैक्स की रकम 15 से 18 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
उन्होंने इसे लेकर नगर निगम में आपत्ति भी दर्ज करा दी है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि उनके भवन तक पानी और सीवर की लाइन नहीं है। इसके बावजूद उनके बिलों में जलकर और सीवर कर जोड़ा गया है। नगर निगम जो सुविधा ही नहीं दे रहा है तो उन चीजों का टैक्स क्यों।