-आर्थिक त्वरित योजना में विधायकों के प्रस्तावों पर मिली हैं पांच करोड़ तक की सड़कें
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। प्रदेश सरकार को विधायकों के प्रस्तावों पर जारी बजट से सड़कों का निर्माण लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से कराने का निर्णय लिया है। ऐसा करने का मकसद सड़कों को गुणवत्तापूर्ण बनाना है। यानी कहीं न कहीं विधायकों के ठेकेदारों द्वारा किए जाने वाले कार्यों पर भरोसा नहीं है।
बता दें कि आर्थिक त्वरित योजना के तहत प्रदेश सरकार ने सभी विधायकों से सड़कों के प्रस्ताव मांगे थे। जनपद से 246 सड़कों के प्रस्ताव विधायकों द्वारा भेजे गए थे। इनमें भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के साथ ही समाजवादी पार्टी के विधायकों की प्रस्तावित सड़कें भी शामिल थीं। सरकार ने विधायकों के प्रस्तावों पर सड़कों के लिए बजट जारी कर दिया है। सत्ता पक्ष को पांच-पांच करोड़ और विपक्ष के विधायकों को एक-एक करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। खास बात यह है कि अपनी निधि की तरह विधायक इस बजट को अपने चहेते ठेकेदारों के माध्यम से खर्च नहीं कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि सड़कों का निर्माण लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से ही कराया जाए। पिछले दिनों सहारनपुर के दौरे के दौरान हुई बैठक में भी उन्होंने यही निर्देश दिए थे। ऐसे में प्रशासन ने सड़कों की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के कहे अनुसार इन दो विभागों को ही सौंपी है।
सहारनपुर को मिली 33 करोड़ की सड़कें
जनपद में भाजपा के पांच विधान सभा सदस्य और एक विधान परिषद सदस्य हैं, जबकि सपा के दो विधान सभा सदस्य और एक विधान परिषद सदस्य है। सत्ता पक्ष के विधायकों के पांच-पांच करोड़, जबकि विपक्ष के एक-एक करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इस हिसाब से जनपद में आर्थिक त्वरित योजना के तहत 33 करोड़ रुपये की सड़केें बनेंगी।
ऐसे हुआ सड़कों का बंटवारा
लोक निर्माण विभाग विपक्ष के विधायकों के क्षेत्रों की सड़कों का निर्माण करेगा। यानी कुल तीन करोड़ रुपयें की सड़कें बनाएगा, जबकि सत्ता पक्ष के विधायकों की प्रस्तावित सड़कों का निर्माण ग्रामीण अभियंत्रण विभाग कराएगा। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की है।