सहारनपुर। सहारनपुर- दिल्ली स्पेशल ट्रेन में दौराला स्टेशन पर आग लगने की घटना ने रेलवे के आग पर काबू पाने को संसाधनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हकीकत तो ये है कि ऐसी घटना होने पर रेलवे के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। सभी स्टेशनों पर आग पर नियंत्रण पाने के लिए वॉटर हाईड्रेंट सिस्टम तक नहीं हैं। ज्यादातर स्टेशनों से बालू से भरी बाल्टियां भी गायब हो चुकी हैं। यहां तक की कोच में भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं।
सहारनपुर-दिल्ली 04460 स्पेशल ट्रेन सहारनपुर से शनिवार की सुबह 5.20 बजे दिल्ली के लिए चली थी। सुबह करीब 7.10 बजे दौराला स्टेेशन पर पहुंचते ही ट्रेन में भीषण आग लग गई। यात्रियों ने तुरंत बाहर निकल कर अपनी जान बचाई। देखते ही देखते दो बोगी जल गई। सूचना पर दमकल ने काफी देर बाद पहुंची। दौराला की घटना को लेकर रेलवे के अधिकारियों से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया गया कि एसी कोच के अलावा ट्रेनों के अन्य कोच में आग पर नियंत्रण करने के लिए कोई अग्निशमन यंत्र नहीं होता। हर ट्रेन के गार्ड और चालक के पास ही एक-एक अग्निशमन यंत्र रहता है। स्टेशनों पर स्टेशन मास्टरों के पास ही कुछ अग्निशमन यंत्र रहते है। जिनसे तत्काल तो आग पर काबू पाया जा सकता है, मगर यदि आग विकराल रुप धारण कर ले तो ऐसे में अग्निशमन विभाग से ही मदद ली जाती है।
सहानपुर जंक्शन पर ही है वॉटर हाइड्रेंट सिस्टम
सहारनपुर। रेलवे की ओर से सहारनपुर जंक्शन पर ही वॉटर हाइड्रेंट सिस्टम है। यहां के एक से लेकर छह प्लेटफार्म पर ही यह सुविधा है। इसके अलावा आग पर नियंत्रण के लिए हर विभाग को चार अग्निशमन यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इनके अलावा कोई अन्य संसाधन आग पर काबू पाने के लिए नहीं है। जनपद के बाकी किसी भी स्टेशनों पर वाटर हाइड्रेंट सिस्टम नहीं है।
सहारनपुर से ओके होकर चली थी ट्रेन
सहारनपुर। रेलवे अधिकारियों के अनुसार सहारनपुर-दिल्ली स्पेशल ट्रेन सुबह यार्ड से पूरी तक ओके होने के बाद ही निकली थी। सकौती तक ट्रेन सही गई है, दौराला तक पहुंचने पर ही किसी कारण आग लगी है।
अन्य कोई सुविधा नहीं
सरसावा । रेलवे स्टेशन के अधीक्षक राजकुमार ने बताया कि ट्रेन की बोगी अथवा रेलवे स्टेशन के किसी कक्ष या प्लेटफार्म आदि पर आग लगने की स्थिति में केवल चार अग्निशमन यंत्र ही मौजूद है। इनके अलावा उनके पास आग बुझाने के लिए कोई अन्य सुविधा नहीं है। आग की घटना होने पर अग्निशमन विभाग से ही मदद ली जाएगी।
बाल्टियों में बालू के बजाए मिट्टी भरी
देवबंद। रेलवे स्टेशन पर आग बुझाने के लिए पुराने जमाने में टंगी रहने वाली बाल्टियां आज भी लगी हुई हैं। छह बाल्टियों में बालू के स्थान पर मिट्टी भरी हुई है। स्टेशन मास्टर सुनील कुमार का कहना है कि आग लगने की स्थिति में दमकल गाडियों को ही बुलाना पड़ता है।