सहारनपुर में विधानसभा चुनाव 2017 में बहुजन समाज पार्टी के लिए अपनी साख बचाना ही बहुत बढ़ी चुनौती बन गई है। 2012 के चुनाव में 7 में से 4 सीटें हासिल करने वाली बसपा के नकुड़ एवं बेहट में जीत दिलाने वाले दो दिग्गजों के चले जाने के बाद बसपा अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए सीट जिताऊ चेहरे की तलाश कर रही है।
बसपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में चार सीटों बेहट, नकुड़, रामपुर मनिहारन एवं सहारनपुर देहात सीट पर कब्जा किया था, लेकिन पिछले एक माह के दौरान हुए उलटफेर ने बसपा की स्थिति को भी बदल डाला। बेहट के बसपा से जीते विधायक महावीर राणा अब भाजपा का झंडा थाम चुके हैं, जबकि नकुड़ के बसपा विधायक धर्मसिंह सैनी भी बसपा को छोड़कर भाजपा में पहुंच गए हैं।
दो जीते हुए विधायकों के जाने के बाद बसपा का वर्चस्व हिलता नजर आने लगा है। बसपा अब अपनी इन दोनों सीटों को बचाने के साथ, जिले में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए फिर सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है इन दोनों ही सीटों पर बसपा मुस्लिम चेहरों को सामने ला सकती है। सहारनपुर देहात में भी मुस्लिम प्रत्याशी उतारे जाने की तैयारी है। यहां के बसपा विधायक जगपाल को इस बार विधान परिषद भेजा जा सकता है। बसपा की मुसीबत सिर्फ यहीं खत्म नहीं होतीं, इन सीटों के लिए बसपा जिन जिताऊ उम्मीदवार की तलाश कर रही है, फिलहाल तो एक दो ही चेहरे हैं। ऐसे देखना होगा कि बसपा किसी दूसरे दल के मजबूत नेता को भी हाथी की सवारी कराएगी या फिर अपनों में ही जीत के मोहरे की तलाश करेगी।