सहारनपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। खासकर नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को इलाज कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन समेत छह सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार आठ अक्तूबर से लगातार जारी है। जिले के एनएचएम कर्मचारी लखनऊ जाकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ताले लगे हुए हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को खोलने का उद्देश्य यही था कि लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधा मिल सके, लेकिन इन दिनों स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं। स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। आए दिन मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष किशोर सैनी ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। केवल आश्वासन देने से कर्मचारियों की समस्याएं दूर नहीं होंगी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा, ईपीएफ आदि शामिल हैं। उधर, सीएमओ डॉ. शेर सिंह कक्कड़ ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर असर न पड़े, इसलिए नियमित स्टाफ की अलग-अलग जगह ड्यूटी लगाई गई है।
आशा कार्यकर्ताओं का नौवें दिन भी धरना जारी रहा
मानदेय बढ़ाने और स्थायी किए जाने की मांग को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का धरना-प्रदर्शन नौवें दिन भी जारी रहा। उनकी मांग है कि स्थायी कर्मचारी घोषित करने और 26 से 30 हजार तक मासिक मानदेय निर्धारित किया जाए। इस दौरान लता, ललतेश, मिथलेश, नेहा, भावना, पूनम, सुदेश, ममता, पिंकी, सुनीता, बोबी, प्रवीण, रविता, कविता, सीमा आदि रहीं।