नकुड़। सरकारी फाइलों में किसे जीवित कर दिया जाए और किसे मृत यह कोई नहीं समझ सकता। ऐसा ही एक मामला बंदाहेड़ी गांव का है। यहां के रहने वाले बुजुर्ग सेठपाल को एक साल पहले ग्राम सचिव ने सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया। सेठपाल तभी से अपनी जिंदगी का प्रमाण देने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।
एसडीएम कार्यालय पहुंचे गंगोह ब्लॉक के गांव बंदाहेड़ी निवासी बुजुर्ग सेठपाल ने अपना दुखड़ा सुनाते बताया कि उसकी वृद्धावस्था पेंशन बनी हुई थी, लेकिन करीब एक वर्ष पहले अचानक मेरी पेंशन बंद हो गई। इसके बाद उसने जिला समाज कल्याण विभाग कार्यालय पहुंचकर पेंशन न आने के बारे में जानकारी ली। इसमें बताया कि आप मर चुके हो। पीड़ित सेठपाल ने बताया कि उक्त कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 17 जनवरी 2025 को खंड विकास अधिकारी, गंगोह ने ग्राम सचिव से राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजनांतर्गत लाभार्थी पात्रता की जांच कराते हुए सत्यापन आख्या जिला समाज कल्याण अधिकारी, सहारनपुर को पत्रांक संख्या 2975 के माध्यम से प्रस्तुत की, जिसमें मृत घोषित कर दिया गया है।
बताया कि तभी से वह खुद जीवित साबित करने के लिए संपूर्ण समाधान दिवस व जनपद स्तरीय अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पीड़ित बुजुर्ग ने एसडीएम सुरेंद्र कुमार से मामले की जांच कराकर पेंशन चालू कराने की मांग की है। एसडीएम ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।