सहारनपुर। रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के बढ़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए जनपद में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए कृषि विभाग ने 20-20 हेक्टेयर के बीस कलस्टर बनाए हैं। इसमें शामिल किसानों को न सिर्फ प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, बल्कि उनके लिए बाजार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मानव के साथ ही मृदा के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर जोर दे रही है। जिससे कृषि को और अधिक लाभकारी बनाने के साथ ही पर्यावरण को भी सुधारा जा सके। प्राकृतिक एवं जैविक खेती कराने के लिए जनपद में 20-20 हेक्टेयर क्षेत्रफल के बीस कलस्टर बनाए गए हैं। कलस्टर में शामिल किसानों को पहले खेती की इस तकनीक के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद वे अपने कलस्टर में सलाह करके अपनी पसंद की खेती कर सकेंगे। इसमें धान, गेहूं, सब्जियों से लेकर अन्य खाद्यान्न की फसलें भी शामिल होंगी। कृषि विभाग प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले कलस्टर में शामिल किसानों को जैविक कीटनाशक, जैविक खाद, और इन प्रकार की खेती में काम आने वाले उपकरणों पर अनुदान देगा।
दिलाया जाएगा जैविक सर्टिफिकेट
कलस्टर में शामिल प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले किसानों की जमीन को जैविक सर्टिफिकेट दिलाया जाएगा। जिससे उनके खेत में पैदा विभिन्न खाद्यान्नों को जैविक खाद्यान्न स्टोरों के माध्यम से बेचा जा सके। इस सर्टिफिकेट के मिलने से जैविक उत्पादों को बाजार में बढ़िया भाव मिलने में मदद मिलेगी।
जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए कलस्टर तैयार
जनपद में 20-20 हेक्टेयर क्षेत्रफल के 20 कलस्टर तैयार हो गए हैं। इनमें किसान प्राकृतिक एवं जैविक तरीके से खेती करेंगे। इसके लिए पहले किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को न सिर्फ पूरा तकनीकी सहयोग दिया जाएगा, बल्कि उनके लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। ---- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि