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सरसों की बंपर पैदावार से किसान गदगद

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देवबंद। सरसों की अच्छी पैदावार ने किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी है। प्रस्तावित से ज्यादा रकबे में सरसों की फसल ली गई है। दाना अच्छा निकलने से उत्पादन बढ़ा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से बाजार भाव भी अधिक मिल रहा है। इसका फायदा किसानों को मिला है। इस लिहाज से सरसों की फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हुई है।
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इस बार के लिए सरसों का प्रस्तावित रकबा 921 हेक्टेयर था, लेकिन जिलेभर में 1085 हेक्टेयर रकबे में सरसों की फसल हुई। वहीं, सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4650 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ। हालांकि बाजार में सरसों का भाव 6000 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल तक है। इसका लाभ किसानों को मिला है। किसानों की मानें तो बीते वर्ष प्रति बीघा में पौन क्विंटल पैदावार थी, जबकि इस बार डेढ़ क्विंटल तक है।
उपनिदेशक मंडी रिंकी जायसवाल ने बताया कि राजस्थान और अलीगढ़ तक के व्यापारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों से सरसों की खरीद कर रहे हैं। सहारनपुर मंडल के तीनों जिलों में तीन हजार मीट्रिक टन से अधिक सरसों की बिक्री का अनुमान है।
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किसान बोले
सरसों ने दिया फायदा
तलहेड़ी बुजुर्ग के किसान मेनपाल सिंह और विनय कुमार ने बताया कि सरसों की फसल की बुआई में जैविक खाद का इस्तेमाल किया। परिणामस्वरूप इस बार डेढ़ से दो क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से पैदावार हुई।
किसान विनीत त्यागी और यशपाल चौधरी ने बताया कि सरसों के दाम गत वर्ष के मुकाबले अच्छे हैं। किसानों को दोहरा लाभ मिला है। सरसों में कोई रोग नहीं लगा जबकि पिछले वर्षों में रोग आने से उत्पादन पर असर पड़ा था।
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वर्ष रकबा उत्पादकता (क्विंटल प्रति हेक्टेयर) उत्पादन (मीट्रिक टन)
2016-17 980 11.69 1146
2017-18 963 14.49 1395
2018-19 917 14.58 1337
2019-20 857 14.08 1207
2020-21 1085 16.59 1765
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