सहारनपुर के देवबंद में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी की अध्यक्षता में दारुल उलूम वक्फ में हुई शूरा की विशेष बैठक में लॉ कमीशन के बायकाट तथा हस्ताक्षर अभियान को समर्थन देने की घोषणा की गई।
बैठक में उलेमा की मौजूदगी में बहु विवाह, लॉ कमीशन, तीन तलाक और समान नागरिक संहिता पर विचार विमर्श कर सर्वसम्मति से पांच प्रस्ताव पारित किए गए।
बुधवार को आयोजित हुई विशेष बैठक में उलेमा ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ संविधान की दफा 25 के तहत मुसलमानों का बुनियादी हक है। इसके अलावा शरीयत एप्लीकेशन 1937 से स्पष्ट होता है कि तलाक, निकाह, वसीयत और मीरास जैसी समाजी समस्याओं में मुसलमानों पर उनके शरई कानून लागू होते हैं और यही मजहब का बुनियादी हिस्सा है। संसद को इसमें बदलाव का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत देश लोकतांत्रिक देश है जहां विभिन्न मजहबों, रस्मों, रिवाजों पर चलने और मानने वाले लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में जो जवाब पेश किया,
लॉ कमीशन के बायकाट का निर्णय लिया और हस्ताक्षर अभियान चलाया उसमें वह बोर्ड को पूर्ण समर्थन देते हैं। बैठक में नदवातुल उलेमा लखनऊ के मोहतमिम मौलाना सईदुर्रहमान आजमी, मौलाना कमरुज्जमा इलाहाबादी, इस्लामिक फिकह एकेडमी ऑफ इंडिया के महासचिव मौलाना खालिद
सैफुल्लाह रहमानी, मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना सैय्यद अहमद खिजर शाह मसूदी कश्मीरी, मुफ्ती अशरफ अली बांकवी, हाफिज इकबाल अब्दुल्ला सत्तार मुंबई, मौलाना कारी अब्दुल्ला मियां गुजराती, डा. अनवर सईद, मुफ्ती अजीजुर्रहमान फतेहपुरी, मौलाना जकरिया नानौतवी रहे।