सहारनपुर। कांवड़ मार्ग पर ढाबों, होटल, रेस्टोरेंट और ठेलियों पर उनके स्वामियों का नाम अंकित करने को लेकर भले ही राजनीतिक घमासान मचा हो, लेकिन जनपद में कई ऐसे मुस्लिम होजरी कारीगर हैं, जो कांवड़ यात्रा में सांप्रदायिक सौहार्द का रंग भर रहे हैं। 30 से 40 वर्षों से यह शिवभक्तों की पोशाक तैयार करते आ रहे हैं।
दरअसल, मोहल्ला गोटेशाह में व्यापारी हसीब की होजरी फैक्टरी है। इनके यहां कई कारीगर और उनके बेटे तौफीक व शाहिद अपने हाथों से होजरी के कपड़े तैयार करते हैं। हर वर्ष श्रावण शुरू होने से पहले कांवड़ियों की महाकाल लिखी, भोले बाबा की और शिवलिंग की तस्वीर लगी आकर्षक पोशाक बनाते हैं। इसी तरह पीरवाली गली निवासी शाहनवाज 40 और खाताखेड़ी निवासी लियाकत 30 वर्ष से कांवड़ियों की तरह-तरह की सुंदर भगवा पोशाक बना रहे हैं। इसी तरह नूर बस्ती, मंडी समिति रोड, मोहल्ला खानआलपुरा और देहरादून पर भी छोटी-छोटी फैक्टरियों में मुस्लिम कारीगर कांवड़ियों की पोशाक बनाते हैं। उनको होजरी व्यापारियों से छह माह पूर्व ही आर्डर मिल जाते हैं। यहां से हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों कांवड़ियों की पोशाक सप्लाई होती है।
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हमारे यहां पर हर वर्ष कांवड़ियों की पोशाक बनती है, जो बाजार में सप्लाई होती है। उन्हें सिर्फ व्यापार और सेवा से मतलब है। सांप्रदायिक सौहार्द से सहारनपुर की अलग पहचान हैं। नागरिकों से अपील है कि वह सांप्रदायिक सौहार्द को न बिगड़ने दें।हसीब, गोटेशाह के होजरी व्यापारी
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शिवभक्तों की पोशाक के आर्डर हर बार मिलते हैं। होटल और ढाबों पर नाम बदलने की राजनीतिक से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। एक-दूसरे के काम आना ही उनका मकसद है। नागरिक किसी के बहकावे में न आएं।-तौफीक होजरी व्यापारी गोटेशाह
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30 वर्षों से होजरी के कपड़े तैयार कर रहे हैं। अलग-अलग डिजाइन की कांवड़ियों की आकर्षक वेशभूषा भी बनाते हैं। इसी तरह जिले में बड़ी संख्या में मुस्लिम कारीगर भी शिवभक्तों की पोशाक बनाते हैं। - शहीद, होजरी कारीगर, निवासी बरेलियों का मदरसा
40 वर्षों से कांवड़ियों की ड्रेस बना रहे हैं। किसी के चक्कर में आपसी सौहार्द को बिगड़ने न दें। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी के बहकावे न आकर भाई-चारे को ठेस न पहुंचने दें। शाहनवाज, होजरी कारीगर और व्यापारी निवासी पीरवाली गली