अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। जीआईएस सर्वे से जनरेट होने वाले बड़ी राशि के बिलों और नोटिसों की जांच शुरू हो गई है। नगर निगम का राजस्व विभाग खामियां खोज रहा है। ऐसी ही जांच में सामने आया कि एक भवन स्वामी ने स्वयं ही अपना डाटा गलत फीड कर दिया था, जिसके कारण संबंधित करदाता का करोड़ों रुपये का नोटिस सामने आया। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने ऐसे किसी भी बिल व नोटिसों को संशोधन से पहले वितरित न करने के सख्त निर्देश राजस्व कर्मचारियों को दिए हैं।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संगीता गुप्ता ने बताया कि वार्ड 65 कमेला कॉलोनी के भवन संख्या 1158/78/2 निवासी एक करदाता ने अपने भवन का गृहकर-जलकर निर्धारण के लिए जो स्वयं कर निर्धारण प्रपत्र भरकर नगर निगम में जमा कराया था, उसमें प्लाॅट का क्षेत्रफल 08 लाख, 10 हजार 810 वर्ग फीट और भवन की मंजिल 21 दर्शाई गईं थीं। जिस पर सॉफ्टवेयर ने गणना कर उक्त भवन का 66 करोड़ 24 लाख 03 हजार 456 रुपये वार्षिक मूल्यांकन किया और उसी आधार पर 147 करोड़ का नोटिस जनरेट कर दिया। भवन स्वामी ने अपनी त्रुटि स्वीकार करते हुए प्रार्थना पत्र देकर पुनः स्वकर निर्धारण का प्रपत्र भरकर निगम में जमा कराया है, जिसके आधार पर बिल ठीक कराया जा रहा है। ऐसा ही एक अन्य प्रकरण वार्ड नंबर दो मल्हीपुर रोड का सामने आया, जिसमें जीआईएस सर्वेयर द्वारा भवन व भूमि की पैमाइश त्रुटिपूर्ण करने के कारण उक्त भवन का बिल 22 करोड़ 17 लाख रुपये का बन गया था। उन्होंने बताया कि भवन स्वामी द्वारा स्वकर निर्धारण प्रपत्र भरकर दिया गया है। जिसके अनुसार बिल ठीक कर दिया गया है।