सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना के तहत नगर निगम की वर्षों पुरानी लाइब्रेरी भी स्मार्ट बनेगी। लाइब्रेरी में ना केवल नई किताबें खरीदी जाएंगी, बल्कि इंटरनेट और कंप्यूटर की सुविधा भी मुहैया रहेगी। इसके माध्यम से पाठक ऑनलाइन भी अपनी पसंद का साहित्य या जरूरत की पठन सामग्री पढ़ सकेंगे।
दो दशक पहले आराधना शुक्ला के डीएम सहारनपुर और हरीश मलिक के चेयरमैन रहने के दौरान नगर निगम परिसर में लाइब्रेरी की शुरूआत की गई । तब लाइब्रेरी में काफी किताबें रखवाई गई। करीब तीन वर्ष पहले डीएम पवन कुमार और तत्कालीन नगरायुक्त डॉक्टर नीरज शुक्ला ने भी कुछ साहित्य लाइब्रेरी के लिए खरीदा । वर्तमान में लाइब्रेरी की तमाम चीजें अव्यवस्थित हैं, मगर जल्द ही लाइब्रेरी स्मार्ट रूम में नजर आएगी। स्मार्ट सिटी योजना से जुड़े सूत्रों ने बताया कि योजना के तहत लाइब्रेरी को अब ई-लाइब्रेरी बनाने की तैयारी है, इसमें नई पुस्तकें रखे जाने के साथ ही फर्नीचर और किताबों केे व्यवस्थित ढंग से रखने की योजना है। इसके अलावा लाइब्रेरी में इंटरनेट सुविधा भी रहेगी। इसके माध्यम से पाठक ऑनलाइन भी अपनी पसंद का साहित्य या किताबें पढ़ सकेंगे।
स्थानीय साहित्यकारों को मिले जगह
नगर निगम की लाइब्रेरी में तमाम साहित्यकारों का साहित्य मौजूद है। अब लाइब्रेरी को स्मार्ट बनाने की चर्चा के बीच लाइब्रेरी में स्थानीय साहित्यकारों के साहित्य को भी जगह देने की मांग उठने लगी है। चूंकि वरिष्ठ साहित्यकार कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर सहारनपुर के थे। ऐसे में लाइब्रेरी के भीतर उनका बड़ा चित्र लगाने की मांग उठ रही है।
युवाओं के लिए बन सकती है सहयोगी
नगर के युवा बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटरों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। युवाओं के पास एकांत में पढ़ाई करने के लिए कोई जगह नगर में नहीं है। ऐसे में नगर निगम की लाइब्रेरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक अच्छा प्वाइंट बन सकती है। साहित्यकार वीरेंद्र आजम ने नगर निगम अधिकारियों से लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी किताबें भी रखने की मांग की है, जिससे जरूरतमंद खासकर ऐसे घरों के युवाओं को लाभ हो सके, जो महंगी किताबें खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शिक्षा के क्षेत्र में भी कई काम होने हैं, इनमें से एक है लाइब्रेरी स्मार्ट बनाना। इसके तहत हम लाइब्रेरी में तमाम सुविधाएं देने जा रहे हैं। मकसद यही है कि शहर में पठन पाठन के लिए भी एक अच्छा माहौल बने। युवा जो किताबों से दूर हो चुके हैं, वह फिर से किताबों के साथ जुड़ें और लाभ उठा सकें।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।