जिपं अध्यक्ष की कुर्सी बचाने की परीक्षा में सांसद पास
सहारनपुर। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चले घटनाक्रम पर बसपा सुप्रीमो मायावती की खास निगाह लगी रही। कुछ दिन पहले ही मायावती ने सांसद फजलुर्रहमान को तसमीम बानो की कुर्सी हर हाल में बचाने की ताकीद कर दी थी। इसके बाद से ही सांसद भी लामबंदी करने में जुट गए थे। यही कारण रहा कि बैठक में 48 में से केवल 22 सदस्य ही पहुंचे। तीन दिन पहले 25 सदस्यों को सांसद ने अपने पंजाब स्थित गेस्ट हाउस में बुलाया था। वहीं पर वे ठहरे हुए थे। इस वजह से लगातार चौथी बार तसमीम बानो को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बचाने में कामयाबी मिली।
जिला पंचायत का चुनाव किसी पार्टी के बैनर तले नहीं लड़ा जाता है, लेकिन सियासी समर्थन जरूर रहता है। बीजेपी समर्थित जिपं सदस्यों को अपने संगठन, विधायक और पूर्व विधायक पर पूरा भरोसा था कि सियासी गणित में वे बसपा समर्थित अध्यक्ष को बेदखल कर देंगे। तीन दिन पहले तक भाजपा समर्थित सदस्यों को चेहरे खिले हुए थे। बसपा समर्थित सदस्यों ने बताया कि बसपा सुप्रीमो मायावती की पूरे घटनाक्रम पर नजर थी। उन्होंने सहारनपुर के बसपा सांसद फजलुर्रहमान को ‘फ्री हैंड’ कर दिया था। इसके बाद सांसद ने एक-एक कर सभी सदस्यों से संपर्क किया और अपने पक्ष में लामबंदी की। उन्होंने तीन दिन पहले अपने पंजाब स्थित डेरा बस्सी में बसपा और सपा समर्थित जिपं सदस्यों को एकत्र किया था। वहीं पूरी रणनीति बनी थी। यही कारण रहा कि बृहस्पतिवार को जब अविश्वास प्रस्ताव लाया गया तो बीजेपी के साथ केवल 22 सदस्य नजर आए।