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जेल में मनी थी दीपावली, राम ज्योति के भी हुए थे दर्शन

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श्री राम मंदिर आंदोलन: 1990 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक रहे स्व. अधीश - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए कारसेवकों में उत्साह तो था, साथ ही कारसेवकों की पर्दे के पीछे से मदद करने वाले भी खूब थे। विहिप, बजरंगदल और दुर्गा वाहिनी के वरिष्ठ पदाधिकारी पर्दे के पीछे से जिम्मेदारी संभालते थे। तब आंदोलन के दौरान कई कारसेवकों ने तो जेल में ही दीपावली मनाई थी। बजरंगदल के तत्कालीन सह संयोजक दिनेश सेठी पर रासुका भी लग गई थी। वह पत्र आज भी उनके पास है। पर्दे के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक स्व. अधीश आंदोलन की कमान संभाले हुए थे।
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इनके अलावा दुर्गा वाहिनी, बजरंगल और विश्व हिंदू परिषद के जिले के शीर्ष पदाधिकारी कार सेवकों को आयोध्या भेजने में जुटे हुए थे और उनके खाने-पीने की व्यवस्था करते थे। आवास-विकास निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश सेठी बताते हैं कि 1990 में वह बजरंगदल के सह संयोजक थे। उस समय राम मंदिर आंदोलन पूरे जोरशोर से चल रहा था। पंडित गोविंद देव की गिरफ्तारी के विरोध में वह कई कार्यकर्ताओं के साथ 13 अक्तूबर 1990 कुतुबशेर तिराहे पर प्रदर्शन कर रहे थे, जहां से पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार मेरठ की बच्चा जेल में भेजा था। 18 अक्तूबर को जेल में ही कई कार सेवकों के साथ दीपावली मनाई थी और वहीं राम ज्योति यात्रा के दर्शन भी हुए थे। उन पर रासुका भी लगी थी और 1992 में जेल भी जेल गए थे।
पर्दे के पीछे इनकी रही अहम भूमिका
सहारनपुर। दिनेश सेठी बताते हैं आंदोलन की कमान पर्दे के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक स्व. अधीश संभाले हुए थे। उन्हीं के नेतृत्व में कारसेवकों के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की जाती थी। अग्रवाल धर्मशाला और रामलीला भवन में कारसेवक रूकते थे। विहिप के तत्कालीन प्रखंड अध्यक्ष शुगर मिल तिराहा निवासी जयपाल सैनी और दुर्गा वाहिनी की तत्कालीन संयोजिका सुशीला सैनी व विहिप के नगर कार्यवाह अशोक चावला ने भी आंदोलन की कमान संभाल रखी थी। जयपाल सैनी, सुशीला सैनी और अशोक चावला बताते हैं कि आंदोलन पूरे चरम पर था। कारसेवकों को यहां से अयोध्या भेजा जा रहा था। कई गिरफ्तारियां भी हुई तो कई पैदल जंगलों के रास्ते ही अयोध्या पहुंच गए थे। उनके रहने व खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा जाता था।
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रात में टॉर्च के जरिए करते थे इशारा
बड़गांव। आरएसएस के विरेंद्र सिंह बताते है कि उनकी पूरी टीम को उस समय एक दूसरे की मदद करने की जिम्मेदारी दी गई थी। क्षेत्र में तनावपूर्ण व कर्फ्यू जैसा माहौल था। रात के समय अपने लोगों की कुशलक्षेम पूछने के लिए टॉर्च का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन हर क्षेत्र में टॉर्च जलाने के तरीके अलग-अलग होते थे। कारसेवक जंगलों के रास्ते पुलिस से लुकाछिपी करते हुए आगे बढ़ते थे। आरएसएस के जिला कार्यवाह विरेंद्र सिंह, विनोद सिंह, सुखपाल सिंह, सुभाष सिंह आदि ने बताया कि पांच अगस्त को करोड़ों हिंदूओं की आस्था और भव्य राम मंदिर बनने का दशकों से चला आ रहा सपना पूरा हो जाएगा। यह बेहद ही गर्व की बात है।
अव्यवस्थाओं पर जेल में किया था उपवास
बेहट। गांव साढौली क़दीम निवासी भाजपा नेता नरेंद बंसल ने बताया कि मंदिर आंदोलन के दौरान विहिप, किसान संघ, बजरंग दल को मिलाकर कारसेवा समिति का गठन किया गया था। वह उस समय कारसेवा समिति के तहसील अध्यक्ष थे। सभी लोगों ने अहम भूमिका निभाई। सैकड़ों लोगों ने गिरफ्तारी दी, जिन्हें मेरठ जेल भेजा गया। तब जेल में अव्यवस्था दिखी तो वह चार दिवसीय उपवास पर बैठ गए थे। उस समय मेरठ के भाजपा विधायक लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने स्वयं धरनास्थल पहुंचकर जेलर से बात करके उनका उपवास तुड़वाया था।
श्रीराम मंदिर निर्माण के साथ पूरा होगा संघर्ष
देवबंद। कारसेवक व भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष गजराज राणा बताते हैं कि 26 अक्तूबर 1990 को देवबंद से अयोध्या कूच करने के लिए रेलवे स्टेशन पर जा रहे थे तो पुलिस ने सरकारी अस्पताल के सामने उन्हें रोक दिया। कुछ देर नोकझोंक हुई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बाद में सहारनपुर-मुजफ्फरनगर नगर मार्ग पर बनी अस्थाई जेल भेज दिया गया। उस समय जेल का निर्माण आधा अधूरा था, वहां दरवाजे तक नहीं थे। उनके मुताबिक जेल में उनकी भाजपा के वरिष्ठ नेता मदन लाल खुराना से मुलाकात हुई थी, जितने समय वह जेल में रहे मदन लाल खुराना उनका हौसला बढ़ाते रहे। वहीं, शिक्षक नगर निवासी कारसेवक प्रवीण गोयल बताते हैं कि 1990 में वह छुपते छुपाते अयोध्या जाने को निकले थे, लेकिन पुलिस ने एमबीडी चौक के पास से उन्हें पकड़ लिया था। उन्हें व नरेंद्र कुमार, बाबा रामायणी और अशोक माली को मेरठ जेल भेजा था।
जेल में गाते थे प्रभु श्रीराम और देशभक्ति के गीत
नकुड़। कस्बा नकुड़ निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता सरस गोयल ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान अयोध्या जाने के लिए निकले थे, लेकिन पुलिस ने गिरफ्तार कर मेरठ की बच्चा जेल भेज दिया था। उसी जेल में सहारनपुर निवासी श्री रामायण वाचक श्याम सुंदर दास शर्मा और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा भी बंद थे। श्याम सुंदर दास शर्मा कारसेवकों को भगवान श्रीराम के भजन व देश भक्ति के गीत सुनाकर प्रेरित किया करते थे। जेल में कारसेवक अपना भोजन खुद ही तैयार करते थे।

श्री राम मंदिर आंदोलन: आरएसएस के तत्कालीन नगर कार्यवाह अशोक चावला- फोटो : SAHARANPUR

श्री राम मंदिर आंदोलन: दुर्गा वाहिनी की तत्कालीन संयोजिका सुशीला सैनी- फोटो : SAHARANPUR

वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश सेठी।- फोटो : SAHARANPUR

श्री राम मंदिर आंदोलन: विहिप के तत्कालीन प्रखंड अध्यक्ष जयपाल सैनी- फोटो : SAHARANPUR

सरस गोयल- फोटो : SAHARANPUR

प्रवीण गोयल- फोटो : SAHARANPUR

गजराज राणा, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष- फोटो : SAHARANPUR

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