सहारनपुर में हरियाणा और शामली की सीमा से सटे गंगोह में समस्याओं की भरमार है। सहारनपुर की सियासत की राजधानी माने जाने गंगोह के ही पूर्व सांसद रशीद मसूद आठ बार संसद पहुंचे और चौधरी यशपाल सिंह ने प्रदेश की सियासत में अपनी खासी दखल रखी।
मगर, इस विधानसभा की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं दिख रहा है। शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित इस विधानसभा को लंबे समय से तहसील बनाने की मांग हो रही है। मगर, अब तक यह मांग कागजों से बाहर नहीं आई है।
कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने इस इलाके में कुछ साल पहले पुलिस का सर्किल जरूर यहां बना। मगर, सियासतदां चुनावों में विकास की बातें तो खूब करते हैं मगर जीत हार के लिए ध्रुवीकरण और जातीय समीकरणों पर ही नजर रखते हैं।
यही कारण है कि चुनावी वायदे अब तक धरातल पर नहीं उतर पाए। किसी जमाने में सहारनपुर से लेकर वेस्ट यूपी की सियासत का केंद्र गंगोह हुआ करता था। राजनीति में सक्रिय पूर्व सांसद काजी रशीद मसूद और प्रदेश में मंत्री रहे चौधरी यशपाल इसी इलाके के रहने वाले हैं।
मगर, इस क्षेत्र का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि हर साल बुखार में ही यहां सैकड़ों मौतें होती हैं। मगर, स्वास्थ्य सेवाएं कभी पूरी तरह से यहां चुनावी मुद्दा नहीं बना। खादर के कुंडाकला, सुखेड़ी, कुंडाखुर्द, बेगी, नाजर, लखनौती, हलवाना, बुड्ढाखेड़ा जैसे गांव हर साल बीमारी से जूझते हैं।
यहां लंबे समय से विशेष स्वास्थ्य केंद्र की मांग हो रही है। मगर, यह समस्या कभी जनप्रतिनिधियों की आवाज नहीं बनी। हरियाणा और शामली की सीमा पर होने के कारण यहां पड़ोसी राज्य के अपराधी भी मनमानी करने से बाज नहीं आते।
कुख्यात मुकीम काला भी इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा सक्रिय रहा था। इसके अलावा यहां परिवहन निगम की बसों के संचालन की मांग भी बड़ा मुद्दा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सहारनपुर सात सीटों में कांग्रेस यहां खाता खोलने में कामयाब हुई थी।
पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी ने मुस्लिम गुर्जर गठजोड़ के जरिये कामयाबी पाई थी। इससे पहले भी यह फार्मूला यहां सफल हो चुका था। वर्तमान विधायक के पिता मास्टर कंवरपाल और चौधरी यशपाल सिंह यहां से विधायक बन चुके हैं।
यही कारण है कि सपा ने मुस्लिम गुर्जर गठजोड़ की उम्मीद में चौधरी रुद्रसेन को प्रत्याशी बनाया है। वर्ष 2012 में भी सपा ने इन पर दांव खेला था, मगर यह जीत तक पहुंचने से चूक गए थे।
बसपा गुर्जर दलित गठजोड़ की उम्मीद के चलते महिपाल माजरा को प्रत्याशी बनाया है। माजरा वर्ष 2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। कांग्रेस इस सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारने की फिराक में है।
वहीं, कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी भाजपा का दामन थाम चुके हैं, ऐसे में वहां उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। अन्य राजनीतिक दलों के घोषित होने वाले उम्मीदवारों पर भी गंगोह क्षेत्र की जनता की नजर जमी हुई है।