सहारनपुर में घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर एकत्र बारूद किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है। दीपावली पर शहरी इलाकों में चल रही पटाखा फैक्ट्रियों में कई लाख किलोग्राम बारूद एकत्र हो चुका है।
ऐसे में प्रशासन का बेपरवाह रवैया लोगों को मुसीबत में डाले हुए है। कई जगहों पर क्षमता से कई गुना ज्यादा पटाखा और बारूद जमा है। उधर, दिल्ली में पटाखों पर न्यायालय के प्रतिबंध के बाद पहले से तैयार पटाखों की बड़ी खेप भी यहां फंस चुकी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि एक ही जगह पर अलग-अलग नामों से जारी हुए लाइसेंस के चलते पटाखा कारोबारियों के गोदाम ठस चुके हैं। हरियाणा और उत्तराखंड की सीमा से सटे सहारनपुर में बड़े पैमाने पर पटाखे का कारोबार होता है।
कारोबार बढ़ने के साथ ही कारोबारियों ने इसमें अपना खेल भी किया। घनी आबादी वाले क्षेत्र में चल रही फैक्ट्रियों में ही अलग-अलग नामों से बारूद एकत्र करने की क्षमता का लाइसेंस प्राप्त कर लिया।
यही कारण है कि इन फैक्ट्रियों में लाखों किलोग्राम बारूद जमा हो गया है। सहारनपुर शहर में करीब दो दर्जन से ज्यादा लाइसेंसधारी हैं, मगर इनके गोदाम एक ही जगह होने के चलते हादसों का खतरा बढ़ चुका है। सबसे बड़े गोदाम गंगोह-अंबाला लिंक रोड, अंबाला रोड, आतिशबाजान, सहित अधिकांश गोदाम अब आबादी के बीच आ चुके हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह लाइसेंस कई साल पहले जारी किए गए, मगर आबादी के बीच होने के बाद भी इनके नवीनीकरण लगातार हो रहे हैं। दमकल, प्रशासन और पुलिस की ओर से आबादी वाले क्षेत्र में चल रही हजारों किलोग्राम बारूद की क्षमता वाली फैक्ट्रियों में आपत्ति तक नहीं लगाई गई।
आपको बता दें कि कुछ साल पहले यहां पटाखा फैक्ट्री में बड़ा हादसा हुआ था और कई कारीगर इस हादसे का शिकार हुए थे। उस समय पटाखा फैक्ट्री के मालिक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
मगर, इसके बाद प्रशासन ने उस ओर से नजर ही हटा ली। यही कारण है कि अनवरत शहर में नियम विरुद्ध आबादी क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्रियां चल रहीं हैं। इन फैक्ट्रियों में सुरक्षा के भी कोई मानक नहीं हैं। सुरक्षा संयंत्र भी नाम मात्र के हैं, मगर अफसर केवल कागजी खानापूर्ति कर इन्हें शह दे रहे हैं।