दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी
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सहारनपुर में इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक को लेकर देशभर में छिड़ रही बहस पर इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने कहा कि मसलकी इख्तिलाफ (वैचारिक मतभेद) के चलते दारुल उलूम द्वारा दिए गए फतवों को जाकिर नायक के खिलाफ हथियार न बनाया जाए।
नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने रविवार को कहा कि इस्लामिक उपदेशक जाकिर नायक के साथ हमारे मसलकी इख्तिलाफ कल भी थे और आज भी हैं लेकिन वह पूरी दुनिया में इस्लामिक स्कॉलर के तौर पर पहचाने जाते हैं।
मौलाना ने कहा कि हम यह समझते हैं कि जाकिर नायक किसी भी तरह आतंकवाद से जुड़े हुए नहीं हो सकते। उनके खिलाफ सरकार और मीडिया ने जिस तरह हंगामा बरपा है तथा उन पर बिना जांच पड़ताल किए जो इल्जाम लगाए जा रहे हैं हम उनकी मुखालफत करते हैं।
मौलाना मद्रासी ने स्पष्ट किया कि जाकिर नायक के खिलाफ मसलकी और फिकही मामलात के तहत दारुल उलूम द्वारा जो पूर्व में फतवे जारी किए गए थे, आज उन्हें मीडिया जाकिर नायक के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
यह गलतफहमी पैदा करने की कोशिश की जा रही है कि दारुल उलूम देवबंद ने मौजूदा हालात को देखते हुए जाकिर नायक के खिलाफ फतवा जारी किया है जो कि सरासर गलत है। मौलाना ने कहा कि मीडिया के इस रवैये की इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद मुखालफत करता है।
उनको न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। जाकिर नायक के बारे में कोई भी राय कायम करने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।