सहारनपुर नगर निगम के सीमा की एक बार फिर से परिसीमन की कवायद शुरू की गई है। मगर इस बार बेहद गुपचुप तरीके से शहर से सटे बड़ी ग्राम पंचायत शेखपुरा और 13 अन्य गांवों को नगर निगम में शामिल किए जाने की योजना है।
29 जुुुलाई को लखनऊ में सहारनपुर के परिसीमन पर मंथन होना है और उम्मीद है कि इन गांवों को शामिल कर लिया जाएगा। 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद होने वाले निकाय चुनाव को लेकर यह कवायद की जा रही है।
अक्तूबर 2009 में सहारनपुर को नगर निगम घोषित किया गया था और उस वक्त नगर निगम का परिसीमन किया गया। पहले चरण में शहर से सटे हुए 32 गांवों को इसमें शामिल किया गया।
मगर, परिसीमन में आपत्तियों के चलते वर्ष 2012 में प्रदेश भर में हुए निकाय चुनावों में सहारनपुर को शामिल नहीं किया गया। इसके बाद आपत्तियों के निस्तारण में नए सिरे से सीमांकन किया गया। इसमें घंटाघर को केन्द्र मानकर सात किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाले गांवों को नगर निगम में शामिल किया।
इस बीच लगातार नगर निगम के चुनाव की मांग उठती रही, मगर परिसीमन पूरा नहीं होने का तर्क देकर चुनाव नहीं कराया गया। वर्ष 2017 में निकाय चुनाव होने हैं, ऐसे में अब एक बार फिर से परिसीमन को अंतिम रूप देने की कवायद हो रही है।
इसमें शहर से लगते हुए 15 हजार की आबादी वाले शेखपुरा कदीम के अलावा नगर निगम की सीमा से लगते हुए 13 अन्य गांवों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस नए परिसीमन से नगर निगम में करीब 20 हजार मतदाता बढ़ जाएंगे।
शेखपुरा कदीम के अलावा दिल्ली रोड और बेहट रोड के कुछ गांव हैं। यह सभी मुस्लिम बहुल गांव हैं। माना जा रहा है कि नगर निगम की मतदाता सूची में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए यह कवायद की जा रही है। दरअसल, नगर निगम की सीमा में शेखपुरा गांव के जुड़ने से ही मतदाताओं की संख्या में काफी असर होगा।
शहर से सटे जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत शेखपुरा कदीम को लेकर पहले भी असमंजस की स्थिति रही थी। इसे नगर पंचायत का दर्जा देने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। मगर, शहर से सटे होने के कारण वह प्रस्ताव लागू नहीं हो पाया। अब इस गांव को नगर निगम में शामिल किया जाएगा। जबकि पंचायत चुनाव में यहां ग्राम प्रधान चुुने गए हैं। ऐसे में यह पेंच फंस सकता है।