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रोडवेज बस से कट्टों में लाया जा रहा मावा पकड़ा

Sat, 07 Nov 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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मद्देनजर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार दोपहर शहर के सतयुग आश्रम के पास रोडवेज बस से लाया जा रहा चार कुंतल मावा पकड़ा। आटा या चीनी की तरह यह मावा कट्टों (प्लास्टिक बैग्स) में भरकर लाया जा रहा था।
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मिलावटखोरी के शक में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने करीब डेढ़ घंटे के निरीक्षण की कार्रवाई में अलग अलग कट्टों से मावे के पांच अलग अलग नमूने लिए। इन अलग नमूनों से मावे की गुणवत्ता की जांच को तुलनात्मक रूप से परखा जाएगा। लखनऊ से विशेष वाहक के माध्यम से नमूने भेजे जाएंगे ताकि इनकी जांच रिपोर्ट भी जल्द आ सके।

सिटी मजिस्ट्रेट आरके गुप्ता के अलावा खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी सुनील कुमार की अगुवाई में छापामार टीम ने यह मावा पकड़ा। सफेद, नीले और खाकी रंग के कट्टों और कपड़ों की पोटली में भरे गए इस मावे को एक रोडवेज बस से सतयुग आश्रम के पास उतारा गया था।
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निरीक्षण के दौरान टीम को पता चला कि यह मावा मुजफ्फरनगर की मावा मंडी से यहां लाया गया था। मावा मंडी से मावे को लेकर आए सप्लायर नवीन मित्तल से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि त्योहारी मौसम में यह मावा शहर के घंटाघर, कोर्ट रोड से लेकर अन्य जगहों पर स्थिति प्रतिष्ठानों पर सप्लाई किया जाना था।

टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी एमके त्रिपाठी, एमके त्रिपाठी, एके सिंह, अशोक कुमार और पीके वर्मा भी शामिल रहे। टीम ने बताया कि नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

गंदे कट्टों में क्यों लाया गया मावा?
निरीक्षण के दौरान टीम ने सवाल किए कि रेडीमेड मावा गंदे कट्टों में क्यों लाया गया। इसे साफ सुथरे प्लास्टिक के डिब्बों या अन्य बर्तनों में क्यों नहीं लाया गया। मावे को गंदगी के ढेर के आसपास उतारे जाने पर भी टीम ने ऐतराज जताया। अलग रंग के आठ कट्टों में यह मावा यहां तक पहुंचा।

रेडीमेड मावे से तैयार होती हैं मिठाइयां
मुजफ्फरनगर के अलावा जिले के ही कुछ देहाती क्षेत्रों से ऐसा रेडीमेड मावा इसलिए मंगवाया जाता है क्योंकि इससे त्योहारी मौसम में दीवाली और भैया दूज जैसे मौके पर झटाझट मिठाइयां तैयार कर ली जाती हैं। इससे मिष्ठान विक्रेताओं और उनके यहां काम करने वाले हलवाई को दूध की बड़ी मात्रा, उससे मावा बनाने के लिए ईधन की अधिक खपत, खराब होने की आशंका जैसी सभी परेशानियों से निजात मिल जाती है।

पहले भी खुल चुकी मावे, पनीर, मिठाइयों की पोल
त्योहारी मौसम में किस तरह गुणवत्ता को ताक पर रखकर मावा, पनीर और रेडीमेड मिठाइयां लोगों तक पहुंचाई जाती है। इसकी पोल पहले भी खुल चुकी है।

पिछले दो महीनों में ही मारे गए छापों में मानकमऊ में चार कुंतल से अधिक रेडीमेड रसगुल्लों को नष्ट कराना पड़ा था। ये रसगुल्ले सड़े और बदबूदार डिब्बों में लाए गए थे। इसके अलावा अंबाला रोड और राकेश टॉकीज के पास काफी मात्रा में इसी तरह सप्लाई को लाए जा रहे पनीर और मावे को नष्ट कराया गया था।

आता है 170 रुपये में, बिकता है 300 में
निरीक्षण के दौरान यह भी पता चला कि यहां सप्लाई को लाया गया रेडीमेड मावा 160 से 170 रुपये प्रति किलो में लाया गया। यही मावा प्रमुख दुकानों पर पहुंचने के बाद ग्राहकों को 280 से 300 रुपये प्रति किलो तक बेचा जाता है। यानी रेडीमेड मावे की कीमत भी रोड से दुकान तक बढ़ जाती है।
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