अंबेहटा चांद निवासी पूर्व सैनिक मदनपाल सिंह। बड़गांव की खबर का फोटो
- फोटो : जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष शशिभूषण दीक्षित से भेंट करतीं पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद।
बड़गांव। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर भारतीय सेना के जाबांजों ने पीओके में चल रहे आंतकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया है। इस ऑपरेशन ने 1965 और 1971 की जंग में भाग ले चुके अंबेहटा चांद निवासी पूर्व सैनिक मदनपाल सिंह को युद्ध के दिनों की याद दिला दी है। वह पाकिस्तान के खिलाफ दोनों लड़ाई घोटारू पोस्ट और अगरतला से लड़ चुके हैं।
पूर्व सैनिक मदनपाल सिंह (85) बताते हैं कि पहलगाम की घटना के बाद से ही खून खौल रहा है। अब उन्हें कुछ सकून मिला है कि आखिर भारतीय सेना ने अपनी बहन बेटियों के सुहाग उजाड़ने वालों को नेस्तनाबूद कर लिया है। वह बताते हैं कि 59 माउंटेन रेजिमेंट एक मई 1965 में गठित हुई थी। सितंबर में आदेश मिला कि पाकिस्तान के साथ चल रही लड़ाई में जाना है। उनकी राजपूत बटालियन तैयार हो गई। उसके बाद वह बटालियन के साथ जैसलमेर सेक्टर की घोटारू पोस्ट पर पहुंचे, जहां उन्होंने पाकिस्तान के साथ पहली जंग लड़ी थी। उनकी बटालियन के कुछ जवान तनौट मंदिर की सुरक्षा में भी तैनात किए गए थे। सीज फायर बंद होने बाद कुछ दिन बाद वह औरगांबाद वापस लौट आए थे।
वर्ष 1971 में उनकी बटालियन ने अगरतला से लड़ाई शुरू की थी। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने लड़ाई से हाथ खड़े कर दिए थे। उसके बाद तीन महीने तक ढाका में रहे। उन्होंने बताया कि युद्ध के समय हमारे सैनिक पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते थे। आज भी हमारी सेना ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने इस दौरान सेना की नौकरी में रहते वक्त मिले अपने कुछ मेडल भी दिखाए। बताया कि वह वर्ष 1980 में सेना से सेवानिवृत हो गए थे।
अंबेहटा चांद निवासी पूर्व सैनिक मदनपाल सिंह। बड़गांव की खबर का फोटो- फोटो : जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष शशिभूषण दीक्षित से भेंट करतीं पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद।