छात्रवृत्ति घोटाले की मंडलायुक्त ने तलब की रिपोर्ट
सहारनपुर। कागजों में मदरसा संचालित दिखाकर छात्रवृत्ति के रूप में सरकारी खजाने से करीब 58 लाख रुपये का घोटाला किया गया। घोटाले की जांच तो कई बार हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि छात्रवृत्ति घोटाले में कई अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। यही कारण है कि मामला लटक रहा है। अब मंडलायुक्त ने इस मामले की रिपोर्ट तलब की है। अब देखना यह है कि क्या इस बार भी कार्रवाई होगी या फिर पहले की तरह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
बेहट तहसील क्षेत्र के बादशाहीबाग में कादरिया उल उलमा एंग्लो मदरसा संचालित होना दिखाया गया था। इसमें हॉस्टल होना भी बताया गया था। मुख्यमंत्री पोर्टल पर और तत्कालीन मंडलायुक्त से इस मामले में शिकायत की गई थी। जिसमें मदरसा कागजों में चलने के आरोप लगे थे। साथ ही छात्रवृत्ति हड़पने के आरोप लगाए थे। इसको लेकर अप्रैल 2018 में जांच हुई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जिस व्यक्ति और कमेटी के नाम पर मदरसा संचालित था, उसने उच्चाधिकारियों को शपथपत्र देकर 2012 में मदरसा बंद करने की बात स्वीकारी थी। इससे साफ हो गया था कि 2012 से 2018 के बीच सरकार की तरफ से दी गई छात्रवृत्ति की धनराशि हजम कर ली गई, जो करीब 58 लाख रुपये बताई गई थी।
- तीन बार हुई इसकी जांच
- अप्रैल 2018 में तत्कालीन बेहट तहसीलदार ने इस मामले में पहली जांच की। जांच रिपोर्ट में मदरसा संचालित होना बताकर रमजान होने की वजह से छात्र छुट्टी पर जाने की बात कही गई। लेकिन मदरसे की बिल्डिंग ठीक नहीं है। इस जांच में फर्जीवाड़ा करने वालों को क्लीन चिट मिल गई थी।
- दूसरी जांच नवंबर 2018 में हुई, जो जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उपनिदेशक और तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शरद कुमार श्रीवास्तव ने की। उनकी जांच में बताया गया कि मौके पर मदरसे की बिल्डिंग नहीं मिली और कोई छात्र भी नहीं मिला। इसमें दो अधिकारियों सहित आठ कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई। बताया गया कि सहारनपुर के मोरगंज स्थित बैंक शाखा में खोले गए 175 खातों के जरिये छात्रवृत्ति घोटाला किया गया।
- तीसरी जांच अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की अध्यक्षता में जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला विकास अधिकारी ने 2019 की। उसमें भी फर्जीवाड़ा होने की पुष्टि हुई और पर्याप्त सबूत मिले। दूसरी बार की जांच रिपोर्ट को सत्यापित करते हुए रिपोर्ट दी गई।
- वर्जन
इस मामले में दिखवाया जा रहा है कि तीन बार जांच होने के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जिस स्तर पर भी लापरवाही हुई है, उनकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। सरकारी धनराशि हड़पने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। -- एवी राजमौलि, मंडलायुक्त सहारनपुर