सहारनपुर। बदलता मौसम और बढ़ता प्रदूषण लोगों के फेफड़ों का प्रभावित कर रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में 20 फीसदी तक मरीज बढ़ गए। जिन मरीजों की हालत गंभीर मिल रही हैं, उन्हें चिकित्सक हायर सेंटर रेफर कर रहे हैं। इस समय एक्यूआई 150 चल रहा है।
बुधवार को विश्व क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) दिवस है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि एक मीडियम साइज की सिगरेट पीने से 20 मिनट जिंदगी के कम हो जाती है। इस सिगरेट में चार हजार हानिकारक तत्व होते हैं। इनमें से 599 तत्वों की लत लग जाती है। 10 से 20 सिगरेट रोजाना पीने से लगभग 15 साल में सीओपीडी का मरीज बन जाता है। सीओपीडी की स्पाइरोमेटरी (कंप्यूटर के जरिए फेफड़ों की जांच) है। राजकीय मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुधीर राठी ने बताया कि सीओपीडी का मुख्य बचाव धूम्रपान रोकना है। इसका इलाज इन्हेलर और सांस के कैप्सूल हैं। इस बार विश्व सीओपीडी की थी सांस फूलने पर सीओपीडी सोचे है। इस उद्देश्य इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के इलाज के लिए अभी देरी नहीं हुई है। जिन लोगों ने धूम्रपान अभी तक नहीं छोड़ा है, वह छोड़ दें।
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कामगारों को सीओपीडी का खतरा सबसे ज्यादा
कारखानों में काम करने वाले लोगों को सांस संबंधी रोग का खतरा ज्यादा है। चिकित्सकों का कहना है कि सीओपीडी एक दिन में होने वाली बीमारी नहीं है। यह कम से कम पांच साल लेती है। कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों के सीने में धूल धीरे-धीरे जमा होती रहती है। इससे उन्हें सीओपीडी हो जाती है।
सीओपीडी की स्टेज
स्टेज एक - सुबह के समय खांसी और गले में खिचखिच की आना
स्टेज दो - दौड़ते समय सांस फूलना और बलगम आना
स्टेज तीन - घर की गतिविधियां जैसे नहाना, कपड़े पहनते समय सांस फूलना