देहात में थम नहीं रहा लंपी वायरस का प्रकोप
बड़गांव/रामपुर मनिहारान/तीतरों (सहारनपुर)। ग्रामीण क्षेत्र में गोवंश में फैले लंपी वायरस का प्रकोप अभी कम नहीं हुआ है। बड़गांव क्षेत्र में ही एक सप्ताह के अंदर लंपी पीड़ित दस गोवंश की मौत हो चुकी है। बीमारी की गूंज लखनऊ तक पहुंचने के बाद टीमें भेज कर पीड़ित पशुओं की जांच के लिए खून के नमूने आदि लेने की कवायद तो की गई, लेकिन पशुपालकों का कहना है कि पशुपालन विभाग की तरफ से पर्याप्त मात्रा में दवाई भी नहीं मिल रही है।
बड़गांव क्षेत्र में एक सप्ताह के अंदर लंपी वायरस से दस गोवंश की मौत हो चुकी है, जबकि सौ से ज्यादा इसकी चपेट में हैं। मरने वाले गोवंश में दल्हेड़ी गांव में शेरपाल पुत्र सुखबीर सिंह की एक बछिया, शिमलाना में सित्ता कश्यप की एक बछिया और एक गाय, महेशपुर में प्रवीण पुत्र सुरेन्द्र एक गाय, नकली पुत्र तेलू सिंह की एक गाय, मांगा चौकीदार की एक गाय, वहीं कस्बा बड़गांव में एक छुट्टा बछिया शामिल है। दल्हेड़ी गांव में एक सांड़ भी इस बीमारी की चपेट में है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भय है कि कहीं इससे गांव के पशुओं में यह बीमारी न फैल जाए। हालांकि पशु चिकित्साधिकारी बड़गांव डॉ. प्रमोद कुमार सैनी दो पशुओं की मौत होने की बात ही स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। समय पर उपचार तथा बचाव ही इसका एक उपाय है। यदि कहीं छुट्टा गोवंश में इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल पशु चिकित्सा विभाग की टीम को सूचित करें ताकि उसका उपचार कराया जा सके।
रामपुर मनिहारान ब्लॉक क्षेत्र के गांव कुराली,अंबोली, उमाही कला, सोना अर्जुनपुर, सिरसली कला, घाटहेड़ा आदि सहित 30 गांवों में लंपी वायरस का प्रकोप चल रहा है। हालांकि विभाग का दावा है कि बड़ी संख्या में पशु ठीक हुए हैं। राजकीय पशु चिकित्सालय पाली क्लीनिक के प्रभारी व पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि क्षेत्र के तीस गांवों में 248 गोवंश लंपी वायरस की चपेट में आए। इनमें से 198 गोवंश उपचार के दौरान ठीक हो गया, जबकि 50 गोवंश का उपचार किया जा रहा है। छह टीमें गठित कर लंपी वायरस के उपचार के लिए क्षेत्र में लगातार जुटी हैं। यह टीमें गांव दर गांव जाकर पशुपालकों को वायरस के बारे में जागरूक कर उपचार कर रही हैं। तीतरो क्षेत्र के पशुपालकों योगेश कुमार, प्रवीण कौशिक, धीरेन्द्र सिंह, लखपतराय सैनी, अंकुर सैनी आदि का कहना है कि जिला प्रशासन के द्वारा चिकित्सकों को संक्त्रस्मित पशुओं के उपचार के लिए निर्देश दिए गए हैं परंतु इसमें औपचारिकता की जा रही है। रादौर निवासी कंवरपाल सिंह, राजपाल सिंह नाथीराम आदि का कहना है कि उनके गांव में कई पशु लंपी वायरस की चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं। चिकित्सक मौके पर आकर देखने के पश्चात दवाई की पर्ची देकर चले जाते हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय चतुर्वेदी का कहना है कि विभाग जितनी मात्रा में दवाई उपलब्ध कराई जाती है उसका पशुपालकों को वितरण कर दिया जाता है। हालांकि अभी तक इस वायरस के खात्मे के लिए वैक्सीन इजाद नहीं हो पाई है फिर भी पशुधन विभाग के कर्मचारी बीमारी को नियंत्रित करने में जुटे हैं।