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विवेचनाओं एवं साक्ष्यों में उलझे हुए हैं मुकदमे

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सहारनपुर। पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है। न सिर्फ एक के बाद एक करके रिपोर्ट दर्ज हुईं हैं, बल्कि कभी मुखौटा कंपनियों के मामले में तो कभी खनन के मामले में सीबीआई छापा मार रही है। ईडी की भी रडार पर है पूर्व एमएलसी। मिर्जापुर, जनकपुरी, सदर कोतवाली समेत विभिन्न थाने में दर्ज मामलों में कार्रवाई को लेकर साक्ष्यों एकत्रित किए जा रहे हैं और गवाहों के बयान दर्ज कराए जा रहे हैं।
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हाजी इकबाल पर सिर्फ सहारनपुर में ही नहीं लखनऊ और दिल्ली में भी मामले दर्ज हैं। जिनमें सीबीआई अपने स्तर से जांच कर रही है। सहारनपुर में हाजी इकबाल, उसके भाई एमएलसी महमूद अली, मुंशी, बहनोई एवं अन्य रिश्तेदारों के अलावा साझीदारों के यहां भी छापा मारा जा रहा है। दो दिन पहले भी सीबीआई ने कार्रवाई की है। इससे पूर्व नौ जुलाई को भी मुखौटा कंपनियों के मामले में कार्रवाई की गई थी।
हाजी इकबाल पर अधिकांश मामले मिर्जापुर थाना में दर्ज हैं। जिसमें धमकी दिए जाने, जमीन पर कब्जे किए जाने, अमानत में खयानत का मामला दर्ज हुआ। यही नहीं जमीन कब्जाने के मामले में गैंगस्टर में भी निरुद्ध किया जा रहा है और हाजी इकबाल के बेटे वाजिद को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। जिसे बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। हालांकि बाद में गैंगस्टर हटा दी गई है।
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पिछले वर्ष मार्च में हुए साढ़े सात बीघा जमीन के कब्जे के मामले में अभी तक जांच चल रही है। साढ़े चार बीघा भूमि के मामले में भी अभिलेखों की जांच की जा रही है। यह जमीन ग्लोकल यूनिवर्सिटी के नजदीक स्थित है। अप्रैल 2017 में 50 लाख रुपये न देने एवं जान से मारने की धमकी दिए जाने के मामले में अभी बयान लिए जा रहे हैं। यह भी मामला अधर में ही लटका हुआ है, जबकि जमीन कब्जे के एक और मामले में अभी तक अभिलेखों की ही जांच नहीं हो सकी है। एसपी देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि करीब आधे दर्जन मामलों में विवेचनाएं चल रहीं हैं। मुकदमों में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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