पत्रक विमोचन में एसिड पीड़िता के साथ कमिश्रन।
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सहारनपुर में पुस्तक मेला में बहादुरी की मिसाल लक्ष्मी और उनकी टीम को पुस्तक मेला समिति की ओर से सम्मानित किया गया।
दरअसल लक्ष्मी साहस और बहादुरी की जीती जागती मिसाल है।
लक्ष्मी ने न केवल खुद बल्कि अनेक एसिड अटैक से पीड़ित लड़कियों की जिंदगी को बदला है। लक्ष्मी जब 15 वर्ष की थी, तब उसके ऊपर एक 32 वर्षीय व्यक्ति द्वारा एसिड डाल दिया गया था।
क्योंकि लक्ष्मी ने उसके प्रणय प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अब लक्ष्मी एक स्वयंसेवी संस्था छांव की निदेशिका है। जो एसिड अटैक पीड़ितों की सहायता के लिए काम कर रही है।
लक्ष्मी को 2014 में अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मान से संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की प्रथम महिला नागरिक मिशेल ओबामा द्वारा सम्मानित किया गया था। पुस्तक मेला पंडाल में आयोजित कार्यक्रम में मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल ने कहा कि लक्ष्मी द्वारा मुंह नहीं ढकने का फैसला कर जो साहस दिखाया गया
है वह हमें अपनी सोच बदलने को मजबूर करता है। एएसपी सुनीति ने कहा कि लक्ष्मी द्वारा महिलाओं के प्रति हिंसा के विरुद्घ जो अभियान चलाया जा रहा है वह निश्चित तौर पर काबिले तारीफ है।
प्रख्यात कार्टूनिस्ट और स्टॉप एसिड अटैक कैंपेन के असीम त्रिवेदी और लक्ष्मी के पति आलोक दीक्षित ने इस मुद्दे पर जुड़ी तमाम पहलुओं को श्रोताओं से रूबरूकराया।