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तैयारियों में बाधा डाल सकता है चिकित्सकों का अभाव

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सहारनपुर। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका है, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुटा है, ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं, लेकिन जिले में चिकित्सकों की कमी कोरोना के खिलाफ जंग में बाधा बन सकती है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सकों की कमी बड़ी समस्या बनी हुई है।
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जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान कोविड संक्रमितों के इलाज का प्रमुख केंद्र राजकीय मेडिकल कॉलेज ही था। यहां सर्वाधिक मरीजों को भर्ती किया। दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी ने भी बहुत कष्ट दिया था, लेकिन उस कमी को लगभग दूर किया जा रहा है। जिले में सात ऑक्सीजन प्लांट तैयार हो चुके हैं, जबकि सात जल्द होने जा रहे हैं। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी तो नहीं खलेगी, लेकिन चिकित्सकों का अभाव पहले की तरह बना हुआ है, जो कोरोना की तीसरी लहर में पीड़ादायक हो सकता है, क्योंकि राजकीय मेडिकल कॉलेज में ही वरिष्ठ चिकित्सकों की कमी है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रोफेसर रैंक के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों को राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा, लेकिन कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद उन्हें फिर से स्थानांतरित कर दिया। जुलाई माह में एक साथ 10 प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर स्थानांतरित किए। इससे राजकीय मेडिकल कॉलेज का शैक्षणिक सत्र और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई। एमबीबीएस छात्रों को पढ़ाने के लिए ना तो पर्याप्त आचार्य हैं और न ही सहायक आचार्य। साथ ही मेडिकल कॉलेज में संचालित अस्पताल में भी ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही है।
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जिला अस्पताल में सिर्फ 29 चिकित्सक कार्यरत
एसबीडी जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 61 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कई साल से 29 ही चिकित्सक कार्यरत हैं। चिकित्सकों के अलावा 114 अन्य तरह के स्थायी स्वास्थ्यकर्मी हैं, जिनमें 65 वार्ड ब्वाय, दस फार्मेसिस्ट आदि कर्मचारी शामिल हैं। करीब 80 आउट सोर्सिंग के कर्मचारी हैं। वहीं, जिला महिला अस्पताल में स्वीकृत 34 पदों के सापेक्ष 14 ही चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें तीन महिला सर्जन (डीजीओ) हैं। नर्सों के 61 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 28 कार्यरत हैं।
देहात में नहीं बाल रोग विशेषज्ञ
देहात क्षेत्र के कई सीएचसी और पीएचसी में 70 चिकित्सक तैनात हैं, जबकि 150 से अधिक पद खाली पड़े हैं। खास बात यह है कि बाल रोग विशेषज्ञ भी देहात के अस्पतालों में नहीं हैं। जबकि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा प्रभाव की आशंका पूर्व में जताई जा चुकी हैं।
पीआईसीयू हो चुके तैयार
कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर जिले में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनकर तैयार कर लिए गए हैं। इनमें राजकीय मेडिकल कॉलेज में 100 बेड, महिला चिकित्सालय में 50 बेड के अलावा सीएचसी फतेहपुर, नानौता, देवबंद और नकुड़ में 12-12 बेड के पीआईसीयू बनाए हैं।
मेडिकल कॉलेज में संपूर्ण एमबीबीएस कोर्स के दौरान करीब 11 विषय होते हैं। प्रत्येक विषय के लिए एक हेड प्रोफेसर होते हैं। वर्तमान समय में कॉलेज में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की भारी कमी है। कुछ प्रोफेसर को शासन ने मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर किया है जो जल्द ही आकर पदभार ग्रहण करेंगे। - डॉ. अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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