सहारनपुर। गीतकार राजेंद्र राजन की पहली पुण्यतिथि पर समन्वय संस्था के द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राजेंद्र राजन और उनकी धर्मपत्नी कवयित्री विभा मिश्रा को भावांजलि अर्पित की।
पंत विहार में डॉ. विजेंद्रपाल शर्मा की अध्यक्षता और आरपी सारस्वत के संचालन में आयोजित संगोष्ठी में सुरेश सपन ने ‘हे! मां वाणी के वरद-पुत्र, स्वर-साधक तुमको नमन-नमन, मंचों पर अनुपम गीतों के आराधक तुमको नमन-नमन, तुम पात-पात झर गए मगर, हर शब्द तुम्हारा रहा हरा, अवनि से अंबर तक चर्चित, प्रिय ‘राजन’ तुमको नमन-नमन।’ पढ़कर तालियां बटोरी। नरेंद्र मस्ताना ने एक दोहे के माध्यम से राजेंद्र राजन को स्मरण किया। उन्होंने पढ़ा कि ‘राजन अपनी कलम से, करते रहे कमाल, गीत ग़जल ऐसे लिखे, देंगे लोग मिसाल।’ हरिराम पथिक ने ‘पृष्ठ में हर शब्द में, वे आवरण में हैं, नींद में, दिन-रात में वे जागरण में हैं।’ विनोद भृंग ने पढ़ा कि ‘सरस मंचों के अधरों की, सरल मुस्कान थे राजन, मधुर स्वर की मधुरता का, मनोहर गान थे राजन। डॉ. वीरेंद्र आजम ने कहा कि राजेंद्र राजन के गीत देश के लाखों लोगों के अधरों की बालकनी पर आज भी चहलकदमी करते हैं। विजेंद्रपाल शर्मा ने कहा कि वास्तव में राजन जी के गीत, मुक्तक एक मानक की तरह हैं जो लंबे समय तक लोग गुनगुनाते रहेंगे। संगोष्ठी में पीएन मधुकर, सुभाषचंद्र वर्मा, मनोज रस्तोगी, रेनू रस्तोगी, रेखा वर्मा, कुलदीप शर्मा, नीता शर्मा, वीणा सारस्वत मौजूद रहे।