यदि आपको सड़क या मकान की छतों पर आंखों पर काली पट्टी बांधकर बाइक चलाने को कहा जाए तो यकीनन आपके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाएगी, लेकिन बागपत जनपद के बड़ौत शहर में कुछ नन्हें बच्चे इन्हीं कारनामों के लिए आजकल काफी चर्चित है।
संकल्प दा पावर ऑफ दा माइंड संस्था से ट्रेनिंग लेकर ये बच्चे खौफ को मात देकर बेखौफ होकर आपको आंखों पर काली पट्टी बांधकर भीड़भाड़ वाले मार्गों और मकानों की छतों पर बाइक और साइकिल दौड़ते मिलेंगे। इतना ही नहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी ये झंडे गाड़ रहे हैं और थर्ड आई के ज्ञान से घोर अंधकार में शिक्षा के ज्ञान का उजागर कर रहे हैं।
बड़ौत की छपरौली चुंगी स्थित संकल्प दा पावर ऑफ दा माइंड से ट्रेनिंग लेकर बच्चे इन खतरनाक कारनामों को इतनी आसानी से आंखों पर काली पट्टी बांधकर कर लेते हैं, जैसे कोई सामान्य व्यक्ति करता है।
इन्हीं खतरनाक कारनामों के लिए आजकल ये बच्चे काफी चर्चित हो रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को इस प्रकार की ट्रेनिंग देने में रुचि ले रहे हैं। ट्रेनिंग लेकर बच्चे सड़कों व मकानों की छतों पर आंखों पर काली पट्टी बांधकर बाइक और साइकिल दौड़ते हैं तो हर कोई दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो जाता है।
संस्थान के संचालकों में जसवीर तोमर और राजीव मलिक के अनुसार अंतर ध्यान से यह सब आसानी से संभव है। उनका मानना है कि प्राचीन काल में हमारे महापुरुष इसी अंतर ध्यान पद्धति का प्रयोग कर कठिन से कठिन कार्यों को आसानी से कर लेते थे। बच्चों को ट्रेनिंग देने का उद्देश्य उनकी ब्रेन पावर बढ़ाना है। जो अंतर ध्यान से ओर भी आसान हो जाती है।
रविवार के दिन विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। बच्चों के खाने पीने और रहन सहन का खर्च संस्था स्वयं उठाती है। ट्रेनिंग के दौरान बच्चों को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया जाता है। फिलहाल संस्था में शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, सहारनपुर, दिल्ली आदि जगहों से बच्चे इस प्रकार की ट्रेनिंग लेने रहे हैं।
इस पद्धति से बच्चों की ब्रेन पावर बढ़ती है, पढ़ाई में फायदा मिलता है, दृढ़ संकल्प लेकर कठिन से कठिन कार्य करने में मदद मिलती है। संचालकों द्वारा बच्चों को आंखों पर काली पट्टी बांधकर पढ़ाई करने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आंखों पर पट्टी बांधकर हर प्रकार के रंग, वस्तुएं पहचान लेते हैं। पट्टी बंधे घर और बाहर आसानी से चल-फिर लेते हैं।
अभिभावकों में बामनौली गांव निवासी सुशील, बिजरौल निवासी शौकेंद्र, शामली निवासी जोगेंद्र ने कहा कुछ समय पहले हमारे बच्चे अंधेरे से डरते थे, पढ़ाई मेें भी कमजोर थे, लेकिन ट्रेनिंग के बाद वह पढ़ाई में झंडे गाड़ रहा है और बैखोफ होकर साइकिल और बाइक चला लेता है।
मुश्किल समय में भी बच्चे बिना किसी की मदद से संभल रहे हैं। मनोविज्ञान डॉ. सतीश ने कहा बच्चों मेें सीखने की क्षमता एक बड़े व्यक्ति से अधिक होती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इसका प्रभाव कम होता चला जाता है।
अंतर ध्यान इस पद्धति में सहायक सिद्ध होता है। श्री महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नरेश शर्मा ने कहा हमारे स्कूल मेें पढ़ने वाले कुछ बच्चे इस संस्था में ट्रेनिंग ले रहे हैं। पढ़ाई को लेकर पहले इनकी आए दिन शिकायतें आती रहती थी, लेकिन अब शिक्षा में अच्छा ध्यान लगा रहे हैं।