फतेहपुर में बृहस्पतिवार की रात दलितों और ठाकुरों में संघर्ष के बाद दलित युवक की मौत से गुस्साए लोगों ने दिल्ली हाईवे जाम कर दिया।
कार्रवाई की मांग को लेकर करीब दो घंटे तक दलित सड़क पर जमे रहे। बाद में अफसरों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर शुक्रवार को उन्हें जेल भेज दिया। तनाव के मद्देनजर गांव में पीएसी तैनात की गई है।
थाना क्षेत्र के गांव फतेहपुर निवासी रामशरण द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट के अनुसार बृहस्पतिवार की रात करीब 8 बजे उसका 22 वर्षीय पुत्र नरेंद्र गांव में एक मकान के पास लघुशंका कर रहा था।
तभी गांव के ही ठाकुर पक्ष के मोहन सिंह से उसका विवाद हो गया। आरोप है कि इस दौरान मोहन, सुरेंद्र उर्फ लाला पुत्र श्याम सिंह, पंकज पुत्र सोहनलाल एवं जोनी पुत्र मोहन उसके पुत्र नरेंद्र के साथ मारपीट करते हुए अपने साथ ले जाने लगे।
दलित समाज के कुछ लोग उसके पक्ष में आए तो उनके साथ भी मारपीट की गई और नरेंद्र को गोली मार दी। इसमें नरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। इस संघर्ष में दलित पक्ष से रामशरण, चाचा लखमी सिंह और मां शोभा घायल हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में धारा 302, 323, 504 व 3 (2), एससी/एसटी एक्ट लगाते हुए आरोपी मोहन, सुरेंद्र और पंकज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
दूसरे पक्ष के अनुसार घटना में मोहन सिंह पुत्र श्याम सिंह और जोनी पुत्र मोहन सिंह भी घायल हुए हैं। उधर युवक की मौत के बाद रात में दलितों ने कार्रवाई की मांग को लेकर दिल्ली हाईवे पर जाम लगा दिया।
सूचना पर चार थानों की पुलिस और सीओ गंगोह योगेंद्र पाल, सीओ हरिप्रकाश कसाना, तहसीलदार कौशल कुमार, एसपी ट्रैफिक ओमवीर सिंह, नानौता थानाध्यक्ष अवनीश यादव सहित एडीएम ओपी वर्मा भी मौके पर पहुंचे।
बसपा नेता जगपाल सिंह, बसपा गंगोह विधानसभा प्रभारी नरेंद्र ओलरी द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के अनुरोध पर करीब दो घंटे बाद कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर जाम खोला गया।
जाम खुलने के बाद पुलिस ने शव को रात में ही पीएम के लिए भिजवाया। तनाव के मद्देनजर गांव में पीएसी तैनात की गई है। शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।