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प्रस्ताव तो खूब गए, लेकिन पक्के आवास नहीं मिले

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प्रस्ताव तो खूब गए, लेकिन पक्के आवास नहीं मिले
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बेहट। हर साल गर्मी के मौसम में अग्निकांड का प्रकोप झेलने वाले घाड़ क्षेत्र में आज भी हजारों परिवार लकड़ी की बल्ली और मिट्टी की दीवारों पर बने घास-फूस के घरों में रहते हैं। ग्राम पंचायत स्तर से इन गरीब परिवारों को पक्की छत दिलाने के लिए प्रस्ताव बने, सर्वे भी किए गए लेकिन आज तक इन्हें पक्के आवास नहीं मिले हैं।
बुधवार शाम आग की भेंट चढ़े खुवाशपुर उर्फ हबीबपुर तपोवन ग्राम पंचायत में 163 परिवारों के पास पक्के मकान नहीं हैं। ग्राम प्रधान रियाजुल चौधरी ने बताया कि उन्होंने ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कराकर भेजा था। प्रस्ताव के बाद सर्वे भी हुआ, लेकिन इन परिवारों को आज तक पक्के आवास नहीं मिले। घाड़ क्षेत्र की अधिकतर ग्राम पंचायतों में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिलती है। फैजाबाद के ग्राम प्रधान सलीम चौधरी ने बताया कि उन्होंने 600 मकानों के लिए प्रस्ताव पारित कर पंचायत राज विभाग को भेजा था, जिसके लिए सर्वे भी हुआ लेकिन एक भी मकान नहीं बन सका। उनके गांव में करीब 150 परिवार छप्पर में रहने को मजबूर हैं। नूरपुर भरावड़ के प्रधान मोहम्मद आलिम ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में 55 परिवार छप्पर के मकानों में रह रहे हैं। उन्होंने करीब 63 मकानों का प्रस्ताव भेजा था। फतेहपुर के ग्राम प्रधान नौशाद चौधरी ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में 70 मकानों के लिए सर्वे किया गया था, लेकिन बजट नहीं मिल पाया। घाड़ के करीब 120 गांवों के हजारों परिवार फूस की छत के नीचे रहते हैं।
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वर्जन
पूर्व में हबीबपुर तपोवन उर्फ खुवाशपुर में कराई गई सामाजिक आर्थिक गणना सूची में उक्त लोगों के नाम नहीं थे। अलग से आवास योजना का कोई बजट नहीं मिल पाया, जिसके चलते पक्के मकान नहीं बन सके। अब मुख्यमंत्री दैवीय आपदा आवास योजना के तहत उक्त लोगों के आवास बनवाने का प्रयास किया जाएगा।
- रविप्रकाश सिंह, बीडीओ साढ़ौली कदीम
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