सहारनपुर में इमाम सहारनपुर कारी सैय्यद इसहाक़ गोरा की अगुवाई में बनाई गई हेल्पलाइन पर रोजेदारों ने सवाल पूछ कर अपनी शंकाओं का समाधान किया।
सवाल : बुशरा जावेद ने मुजफ्फरनगर से जानना चाहा कि उनका बेटा जिसकी आयु 6 वर्ष है, उनके सुसराल वाले चाहते हैं कि वह रोजा रखे, क्योंकि उनके यहां इतनी उम्र में रोजा रखने की परंपरा है। ऐसी सूरत में शरीयत क्या कहती है? शरीयत के हिसाब से बच्चों को कितनी आयु में रोजा रखवाना चाहिए?
जवाब : पांच-छह वर्ष के बच्चों को नाम व शोहरत के लिए या रस्म एवं रिवाज की खातिर रोजा रखवाना मुनासिब नहीं है, बल्कि ये एक तरह का गुनाह है कि उनको जबरदस्ती रोजा रखवाया जाए।
शरीयत में है कि लड़का या लड़की बालिग हो जाए यानी चांद की तारीखों के एतबार से 15 साल के बालिग समझे जाएंगे, परंतु शर्त ये भी है कि बालिग होने के जो पहचान होती है वो लड़की या लड़के को 15 वर्ष से पहले ही होना शुरू हो जाए तो तब भी उनको बालिग समझा जाएगा।
बच्चों को रोजा रखवाने की आदत शुरू कराने का बेहतर तरीका ये है कि बच्चे जब 10 या 11 वर्ष के हो जाएं तो उनसे रोजा रखवाया जाए, ताकि बालिग होते-होते वह रोजा रखने के आदी हो जाएं।
सवाल : अनस रहमान ने अशोक नगर से मालूम किया कि उनकी महीना आमदनी तकरीबन 70 हजार है, परंतु साल भर तक उनके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं होती, क्या ऐसी सूरत में भी उन पर जकात फ़र्ज है?
जवाब : जी नहीं! जिस व्यक्ति की आमदनी माकूल है, परंतु साल भर तक उसके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं रहती तो उस पर जकात वाजिब नहीं।
सवाल : हाफ़िज अदनान ने रायपुर से पूछा कि अगर कोई व्यक्ति तरावीह में कुरान सुनाने पर पैसे की मांग करता है और लेता है। ऐसे व्यक्ति के पीछे नमाज ए तरावीह में कुरान सुनना कैसा है? इस तरह पैसा लेना सही है?
जवाब : हाफ़िज ए कुरान मिले या ना मिले, अगर कोई व्यक्ति कुरान सुनाने पर उजरत या पैसा मांगता है तो छोटी सूरतों से नमाज ए तरावीह अदा कर लेना बेहतर है, पैसा दे कर कुरान ना सुनें, क्योंकि कुरान सुनाने पर उजरत लेना और देना दोनों हराम हैं।
हेल्पलाइन में इस तरह कॉल करें
दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक इन नंबरों पर रोजेदार शरीयत की रोशनी में अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं। नंबर ये हैं। 9897399207, 8923636608, 9319462031, 9319309995