सत्ताधारी समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को जगपाल सिंह गुर्जर को जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनकी जगह पूर्व जिलाध्यक्ष राज सिंह माजरा को कमान सौंपी गई है। कैबिनेट मंत्री बनने से पहले भी साहब सिंह सैनी और उनका गुट इसके लिए प्रयासरत था।
पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की सीट मानी जा रही देवबंद उप चुनाव जीतना राज सिंह के लिए अहम परीक्षा होगी। उधर, पार्टी के निर्णय से जगपाल समर्थकों में मायूसी है और नवनियुक्त जिलाध्यक्ष राज सिंह खेमे में खुशी की लहर है। देवबंद विधान सभा उपचुनाव की घोषणा के बाद शुक्रवार को समाजवादी पार्टी ने राज सिंह माजरा को जिलाध्यक्ष बनाया है।
इस सियासी उलटफेर के पीछे कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। यह दूसरा मौका है जब राज सिंह को जिले की कमान मिली है। वर्ष करीब ढाई साल पहले तक राजसिंह ही जिलाध्यक्ष थे। लोकसभा चुनाव से करीब छह माह पहले अवैध खनन और महिला जिलाध्यक्ष के संगीन आरोपों के बाद पार्टी ने उन्हें हटा दिया था।
इसके बाद पैकफेड उपाध्यक्ष अभय चौधरी और फिर रामशरण दास के बेटे जगपाल सिंह गुर्जर को जिलाध्यक्ष बनाया गया।
राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई देवबंद सीट पर उप चुनाव की तिथि की घोषणा हो चुकी है। यह सीट सपा के खाते में थी और विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इस चुनाव को सेमीफाइनल के रूप में भी देखा जा रहा है।
ऐसे वक्त में पार्टी के बदलाव के बाद अब राज सिंह माजरा के सामने देवबंद उप चुनाव जीतना परीक्षा से कम नहीं होगा। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष ने कहा कि पार्टी ने जिम्मेदारी दी है उसका पूरी निष्ठा से निर्वहन किया जाएगा।
बधाइयों का सिलसिला
शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर आए फैक्स का दोपहर तक पूरे जिले में खबर पहुंच गई। इसके बाद जिलाध्यक्ष राज सिंह माजरा के पास बधाइयों का तांता लग गया। उनके समर्थकों ने ढोल नगाड़ों के साथ एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
आरोपों के चलते हटाए गए थे माजरा
हरियाणा-यूपी के बार्डर पर स्थित मंधौर गांव में करीब तीन साल पहले अवैध खनन में हुए संघर्ष में एक युवक की मौत हो गई थी। उस वक्त इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन जिलाध्यक्ष राज सिंह माजरा का नाम आया था। इसके ठीक बाद महिला सभा की जिलाध्यक्ष ने बेहद संगीन आरोप लगाए थे। इसके बाद पार्टी हाईकमान ने इन्हें पद से हटाया था।