सहारनपुर। अमेरिका के टैरिफ वार और अब ईरान-इस्राइल टकराव से जिले के वुड काॅर्विंग उद्योग को झटका लगा है। उद्यमियों की मानें तो ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण करीब 250 करोड़ का निर्यात रुक सकता है। जिले से कुल माल का करीब 15 फीसदी यानी करीब 250 करोड़ का निर्यात ईरान समेत अन्य गल्फ देशों में होता है। टैरिफ के चलते पहले ही करीब 500 करोड़ रुपये के ऑर्डर होल्ड पर है।
अमेरिका के भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद से जिले के वुड काॅर्विंग निर्यातकों को झटका लगा था। हालांकि, इसके बाद अमेरिका ने टैरिफ को जुलाई तक के लिए टाल दिया था। इसके बावजूद भी निर्यातकों को कोई खास ऑर्डर नहीं मिले। अब ईरान-इस्राइल के बीच हो रहे टकराव के चलते स्थितियां और भी उलझ गई है। सहारनपुर से निर्यात होने वाले माल का करीब 55 फीसदी अमेरिका को जाता है। इसके अलावा ईरान, सऊदी अरब, दुबई में करीब 15 फीसदी सामान का निर्यात होता है।
प्रतिबंधों के चलते भारत से सीधा माल ईरान नहीं जाता है। वह गल्फ देशों के रास्ते ईरान तक पहुंचता है। ईरान-इस्राइल के बढ़ते संघर्ष के बीच अन्य पड़ोसी देश भी अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में लगे हैं। इसका असर सीधा निर्यात होने वाले माल पर पड़ रहा है। जिले में वुड काॅर्विंग उत्पादों का सालाना करोबार करीब 1300 से 1600 करोड़ रुपये का है। इसमें करीब 1100 से 1200 करोड़ रुपये वार्षिक का निर्यात शामिल है।
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- बोले कारोबारी
पहले अमेरिका के टैरिफ और अब ईरान-इस्राइल संघर्ष से निर्यात को झटका लगा है। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो जिले के निर्यातकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है। अमेरिका से टैरिफ पर बात बनने पर जिले के वुड काॅर्विंग उद्योग को जरूर राहत मिलेगी।
- आरिफ खान, हैंडीक्राफ्ट्स आर्टीजन एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन महासचिव
-ईरान-इस्राइल संघर्ष के चलते सामान लेकर जाने वाले जहाजों को अन्य रास्तों को इस्तेमाल करना होगा। इसके चलते फ्यूल कॉस्ट बढ़ जाएगी। इसका असर उत्पाद की कीमत पर पड़ेगा। संघर्ष के लंबा चलने पर डिमांड कम होने की उम्मीद है, जिसका असर निर्यात पर पड़ेगा।
-मयंक अग्रवाल, उद्यमी एवं निर्यातक
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- पहले अमेरिका के टैरिफ और अब ईरान-इस्राइल संघर्ष ने हैंडीक्राफ्ट के निर्यात पर व्यापक असर डाला है। अमेरिका से पिछले छह माह में कोई नया ऑर्डर नहीं मिला है। यदि संघर्ष में अमेरिका भी कूद जाता है तो हैंडीक्राफ्ट पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा।
- साबिर खान, निर्यातक
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- वैश्विक स्तर पर परिस्थितियां लगातार बदल रही है। दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में उथल पुथल जारी है। इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। जब अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है तो इसका असर व्यापक असर उद्योगों पर बढ़ता है। यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद अब ईरान-इस्राइल युद्ध ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।
- रामजी सुनेजा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए