शिव धाम मंदिर में आयोजित राम कथा में महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि महाराज के साथ पहुंचे योगगुरु
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सहारनपुर। शिवधाम कॉलनी में जारी श्रीराम कथा के तीसरे दिन महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने भक्तों को कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा का किसी को आमंत्रण नहीं दिया जाता। कथा का आमंत्रण तो पवन देव स्वयं सभी को देते हैं। कथा के तीसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी रामदेव भी मौजूद रहें।
आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि भक्ति मार्ग में न कर्मकांड की आवश्यकता होती है न ही मंत्रों की। न तिथि देखी जाती है और न ही वार। जहां राम का नाम वहीं अयोध्या। राम वन को गए तो वन ही अयोध्या हो गई। जब भगवान राम वन पहुंचे तो कुछ समय बाद माता सती उनकी परीक्षा लेने के लिए वन पहुंचीं। माता सती को देखकर प्रभु राम माता को प्रणाम करते हैं। इतना सुनने के बाद बाद माता सीता प्रभु शिव के पास कैलाश धाम लौट जाती हैं। भगवान शिव 87 हजार संवत के लिए समाधि पर चले जाते हैं। भगवान शिव जब समाधि से जागते हैं तो उनके मुख से राम नाम निकलता है।
प्रभु राम जी की महिमा अपरंपार है। इस समस्त जगत में केवल प्रभु ही स्मरणीय करने योग्य हैं क्योंकि वह पग पग पर हमारी रक्षा करते हैं। प्रभु राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मर्यादित होकर जिया। इस मौके पर अक्षय जैन, राजीव गुप्ता, फतह सिंह बाजवा, राहुल भाटिया, अंकित जैन आदि मौजूद रहे।
- सहारनपुर से मेरा तीन दशक पुराना नाता : स्वामी रामदेव
श्रीराम कथा में पहुंचे स्वामी रामदेव ने कहा कि सहारनपुर से उनका तीन दशक पुराना नाता है। जब उन्हें दुनिया में बहुत थोड़े लोग जानते थे। वह तब भी सहारनपुर आते थे। माहेश्वरी धर्मशाला में उन्होंने तीन दशक पहले छोटा सा योग का कार्यक्रम किया था। सहारनपुर से उनका आत्मीयता का संबंध है। भौतिक संपत्ति, बिना आंतरिक संपत्ति के विपत्ति हो जाती है। हम सभी को धर्म का दर्शन करना चाहिए। इससे आंतरिक संपत्ति बढ़ती है। हरि नाम जगत में अमृत है। इस छोड़कर विष का पान क्यों करना।