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Saharanpur News: जांच हुई, दोषी पाए गए, कार्रवाई के नाम पर खामोशी

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- जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर से मरीज को निजी अस्पताल भेजने का मामला
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- स्टाफ की जांच के लिए दो डॉक्टरों सहित पांच सदस्यीय टीम हुई थी गठित
- जांच टीम ने स्टाफ को पाया था दोषी, कार्रवाई नहीं होने से उठ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल से मरीज को निजी अस्पताल भेजने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कमेटी ने जांच रिपोर्ट में एक स्टाफ को दोषी पाया है। रिपोर्ट में बताया कि स्टाफ ने न सरकारी एंबुलेंस को कॉल की और न ही ऑन कॉल सर्जन को फोन किया गया। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर खामोशी से सवाल उठ रहे हैं।
14 जून को राजेश कुमार अपने भांजे उदय सिंह के घायल होने पर जिला अस्पताल में लेकर आए थे। उन्हें इमरजेंसी से ट्रामा सेंटर में शिफ्ट किया था। यहां से घायल को निजी अस्पताल भेज दिया था, जहां उनकी मौत हो गई थी। तब आरोप लगा था कि स्टाफ निजी अस्पताल में कमीशन लेने पहुंची। इस मामले में पांच सदस्य टीम गठित हुई थी, जिसमें वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. शिव दत्ता, परामर्शदाता डॉ. वीरेंद्र भट्ट, प्रभारी फार्मेसी अधिकारी ब्रह्मानंद, मुख्य फार्मासिस्ट अनिता पुरी, सहायक नर्सिंग अधीक्षिका मंजू रानी शामिल थीं।
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जांच कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि ट्रामा सेंटर में तैनात स्टाफ ने सरकारी एंबुलेंस पर कॉल नहीं की और न ही किसी सर्जन को कॉल किया था। इतना ही नहीं जांच रिपोर्ट यह भी दर्शाया गया कि एक स्टाफ ने बयान देने पर सुसाइड करने की धमकी दी। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट बनाकर जांच टीम ने प्रमुख अधीक्षक को सौंपी। इस मामले को करीब तीन महीने बीत गए, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह हाल तब है जब जांच टीम ने एक स्टाफ को मामले में दोषी पाया है।
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वर्जन
मरीज को निजी अस्पताल भेजने के मामले की जांच पूरी हो गई है। इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेज दी गई थी। क्योंकि स्टाफ उन्हीं के अधीन है। जो भी कार्रवाई होगी। उन्हीं के स्तर से की जाएगी। - डॉ. रविप्रकाश, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
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