सहारनपुर। उद्योग विभाग प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत परंपरागत कारीगरों को प्रशिक्षण देगा। 15 हजार रुपये की टूलकिट भी निशुल्क दिलाएगा। साथ ही उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने के लिए सस्ती दरों पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। जनपद को 1500 का लक्ष्य दिया गया है।
हस्तशिल्पियों को कौशल को आधुनिक उपकरणों का छह दिवसीय प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें स्वरोजगार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके बाद कारीगर स्वयं अपनी जरूरत के अनुसार 15 हजार रुपये के छोटे उपकरण (टूलकिट) खरीद सकेंगे, जिसका भुगतान इस योजना के तहत किया जाएगा। कारीगरों को स्वरोजगार करने के लिए पांच प्रतिशत की दर से एक लाख रुपये तक का ऋण 18 महीने के लिए दिया जाएगा।
यदि ऋण की अदायगी सही रहती है तो फिर इसके बाद कारीगर को दाे लाख रुपये का ऋण 30 महीने के लिए पांच फीसदी की दर पर दिया जाएगा। जिससे कारीगर अपने स्वरोजगार को सही प्रकार से स्थापित कर सके। योजना के तहत इन कारीगरों के उत्पादों को देश भर में लगने वाले मेलों को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल दिलाने के साथ ही उनके जाने जाने से लेकर अन्य खर्चों को भी वहन किया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए कारीगरों को जन सुविधा केंद्र पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
- योजना में ये ट्रेड हैं शामिल
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में परंपरागत हस्तशिल्पी और कारीगरों काे शामिल किया गया है। इसमें बढ़ई, लोहार, ताला बनाने वाले, मूर्तिकार, सुनार, कुम्हार, मोची, राज मिस्त्री, टोकरी, बुनकर, झाड़ू बनाने वाले, खिलौने बनाने वाले, माली, धोबी, दर्जी, टूलकिट बनाने वाले आदि शामिल हैं।
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कारीगर कर सकेंगे स्वरोजगार
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत उद्योग विभाग परंपरागत हस्तशिल्पियों और कारीगरों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उन्हें सस्ती दर पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। जनपद को 1500 कारीगरों का लक्ष्य दिया गया है। - वीके कौशल, उपायुक्त उद्योग।