सहारनपुर। यूक्रेन के अलग-अलग शहरों से किसी तरह निकलकर पोलैंड तथा रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे भारतीय छात्र भूखे-प्यासे हैं। अमर उजाला के पास ऐसे करीब एक दर्जन छात्रों के नाम हैं। उनके परिजन तनाव में हैं। वे दिन-रात न्यूज चैनलों के जरिए यूक्रेन के हालात पर नजर बनाए हैं। स्मार्ट फोन के जरिए बच्चों की पल-पल की खबर ले रहे हैं। पेश हैं रिपोर्ट...
एसबीडी जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रमेश चंद्रा की बेटे केशव चंद्रा नेशनल मेडिकल कॉलेज विनीसिया से एमबीबीएस कर रहे हैं। वह किसी तरह रविवार सुबह रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। हालांकि वहां कोई मदद नहीं मिली है। ऐसे में वह भीड़ में फंसकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। माहीपुरा निवासी इरफान यूक्रेन के तेरनोपिल शहर में एमबीबीएस कर रहे हैं। वह शनिवार शाम दो बजे से रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हैं। आरोप है कि सरकार द्वारा जारी एंबेसी के नंबरों पर संपर्क नहीं हो पा रहा है। बॉर्डर पर करीब पांच हजार भारतीय नागरिकों की भीड़ है। बड़गांव निवासी पीयूष राणा शनिवार रात करीब साढ़े दस बजे रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। रविवार शाम तक वापसी की व्यवस्था नहीं हुई।
चिलकाना निवासी अजीम अंसारी ने बताया कि वह साथियों के साथ बस द्वारा किसी तरह पोलैंड के बॉर्डर से 20 किमी दूर पहुंचे हैं। किसी को भी सीमा की तरफ नहीं जाने दिया जा रहा है। यूक्रेन तथा पोलैंड के बॉर्डर पर बहुत से छात्र एकत्र हैं। उन्हें पोलैंड की सीमा में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। चिलकाना के मोहल्ला मजहर हसन निवासी शोएब कुरैशी बस द्वारा रोमानिया बार्डर पहुंचा। यहां से सोमवार तक फ्लाइट मिलने की उम्मीद है। यूक्रेन के इवानो शहर में एमबीबीएस कर रही नकुड़ के गांव बाधी निवासी मानसी रविवार सुबह रोमानिया बॉर्डर पहुंचीं, लेकिन शाम तक फ्लाइट नहीं मिली। सरसावा निवासी शशांक चौहान भी रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हैं।
हॉस्टल के बंकर में बंद हैं छात्र
रामपुर मनिहारान के गांव साढ़ौली हरिया निवासी काजल चौधरी कीव शहर से एमबीबीएस कर रही हैं। वह हॉस्टल में फंसी हैं। काजल ने परिजनों को वीडियो कॉल करके बताया कि वह साथी छात्रों के साथ हॉस्टल के बंकर में है। इसी तरह सहारनपुर के वैभव गांधी भी कॉलेज के बंकर में हैं।
बॉर्डर से फिर कॉलेज लौट गया अजय
रामपुर मनिहारान के गांव घाटहेड़ा निवासी देवेंद्र सिंह के पुत्र अजय लबीब विश्वविद्यालय एमबीबीएस कर रहे हैं। देवेंद्र सिंह ने बताया कि उनका बेटा साथी छात्रों के साथ पौलेंड बॉर्डर पहुंचा था। वहां कोई व्यवस्था नहीं होने पर भूखे प्यासे घंटों भटकने के बाद फिर कॉलेज लौट गया। देवेंद्र सिंह की अपील है कि सरकार बच्चों को सुरक्षित वापस लाने में मदद करे।