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युवाओं में मशरूम की खेती की बढ रहा रूझान, ले रहे प्रशिक्षण

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सहारनपुर। कोरोना संकट के दौर में युवाओं का मशरूम की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है। इसके चलते कृषि विज्ञान केंद्र में काफी पढ़े लिखे युवा भी मशरूम उत्पादन के लिए न सिर्फ जानकारी हासिल कर रहे हैं बल्कि प्रशिक्षण भी ले रहे हैं। जनपद में करीब 150 से अधिक मशरूम उत्पादन की इकाइयों में उत्पादन हो रहा है।
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मशरूम की खेती जनपद में लोगों के लिए रोजगार का अच्छा साधन बन रही है। इसमें औषधीय गुणों और पोषक तत्वों के चलते जहां यह स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी है वहीं बढ़िया आमदनी के चलते लाभकारी भी साबित हो रही है। जिले में सफेद बटन, ऑस्टर और मिल्की मशरूम की खेती होती है। इससे उपभोक्ताओं को वर्ष भर मशरूम प्राप्त होती है। गांव शेखपुरा के एमए बीएड तक शिक्षित युवा प्रवीन कुमार ने भी केवीके में मशरूम की खेती के लिए प्रशिक्षण लिया है। उनका कहना है कि इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। ग्रेजुएट और केमिकल कारोबारी रजत जैन और गृहणी कंवरजीत कौर ने भी मशरूम की खेती करने में दिलचस्पी दिखाई है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और मशरूम विशेषज्ञ डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि युवाओं में मशरूम की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है। कोरोना संकट के चलते बाहर नौकरी छोड़कर आए कई युवाओं ने भी मशरूम की खेती को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाई है। दर्जन भर से अधिक युवाओं ने इसके लिए प्रशिक्षण भी ले चुके हैं। जनपद में पहले से ही 150 इकाइयों में मशरूम का उत्पादन हो रहा है। यहां से देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़ आदि शहरों में मशरूम की सप्लाई होती है।
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मशरूम की खेती के फायदे ----
- मशरूम में लागत कम
- औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर
- झोपड़ी या कमरे में उत्पादन
- कम मेहनत में अधिक फायदा
- कंपोस्ट खाद के रूप में अवशेष का उपयोग
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