सहारनपुर में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना के तीसरे चरण में भी सहारनपुर अपनी जगह नहीं बना पाया। हालांकि उत्तर प्रदेश के तीन जिलों का चयन हुआ है, मगर लंबे समय से तैयारियों में जुटे सहारनपुर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के मानकों पर खरा नहीं उतरा है।
ऐसे में साफ है कि नगर निगम और अधिकारियों की लापरवाही से स्मार्ट सिटी में एक बार फिर सहारनपुर पिछड़ गया है। कई मौके मिलने के बाद भी इस असफलता से यह साफ हो गया है कि अधिकारी मानकों को पूरा करने में संजीदा नहीं रहे।
इससे पहले भी दो चरण व एक फास्ट ट्रैक चरण में सहारनपुर का चयन नहीं हो पाया था। हर बार बुनियादी स्तर पर कमजोर सहारनपुर का प्रपोजल सफल नहीं हो पाया था।
स्मार्ट सिटी योजना के जरिए शहर के विकास की उम्मीद लगाए लाखों लोगों को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। मूलभूत सुविधाओं और सरकारी विभागों से समन्वय नहीं बन पाने के कारण सहारनपुर की कार्ययोजना प्रभावी नहीं बन पाई है।
इसके अलावा पिछले दो चरण में कार्ययोजना की खामियों को दुरुस्त करने को मिले मौके का भी नगर निगम लाभ नहीं उठा पाया। जबकि दो बार पिछड़ने के बाद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने कानपुर को इस सूची में शामिल कराने वाली मुंबई की दर्श कंसल्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सहारनपुर की कार्ययोजना बनाने का जिम्मा सौंपा था।
सबसे बड़ी बात है कि सहारनपुर नगर निगम पेयजल, बस अड्डा, अतिक्रमण जैसी छोटी समस्याओं पर भी प्रभावी काम नहीं कर पाए। नगर निगम शहर में करीब 24 फीसदी घरों में पानी उपलब्ध करा पा रहा है।
यानी करीब 75 फीसदी घरों में पानी की व्यवस्था लोगों ने स्वयं की हुई है। तीन साल से चल रही स्मार्ट सिटी योजना की प्रक्रिया के दिन से नगर निगम शत प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचाने के दावे कर रहा है, मगर वह दावे केवल कागजी ही साबित हुए हैं।
इसके अलावा शहर में जगह-जगह गलत तरीके से बस और टेंपो स्टैंड चलाए जा रहे हैं। परिवहन निगम के दोनों बस स्टैंड को कई साल से शहर से बाहर करने की बात कही जा रही है, मगर इस दिशा में अभी तक एक भी कदम नहीं बढ़ा है।
घंटाघर पर टेंपो, चकराता रोड पर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के बाहर प्राइवेट बस स्टैंड आदि अनाधिकृत रूप से चलाए जा रहे हैं। वहीं, शहर में जगह-जगह स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण फैला हुआ है। इसे लेकर पिछले कई साल से जिला प्रशासन और नगर निगम ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।