मसूद ने कहा कि दलित-मुस्लिम एकजुट होकर वोट की चोट करेंगे तो ही वर्ष 2024 में भाजपा को दिल्ली की गद्दी पर बैठने से रोका जा सकेगा। कुछ माह पहले तक सपा मुखिया अखिलेश यादव की शान में कसीदे पढ़ने वाले इमरान मसूद ने पार्टी बदली तो अखिलेश के प्रति सुर भी बदल लिए। उन्होंने कटाक्ष किया कि उन्हें (अखिलेश यादव) को मुस्लिम वोट तो चाहिए, लेकिन आजम खां हों या फिर विधायक नाहिद हसन उनके पास इतना वक्त ही नहीं है कि वह उनके हक में आवाज बुलंद कर सकें।
संचालन कर रहे वरिष्ठ समाजसेवी साद सिद्दीकी ने कहा कि लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की संख्या लगातार कम हुई है। इसलिए वक्त आ गया है कि सूझबूझ से काम लिया जाए और एजेंडे पर चलकर उसे कामयाब बनाया जाए। इस दौरान उलमा ने भी सर्वसमाज को जोड़ने पर बल दिया। अध्यक्षता मौलाना सालिम अशरफ कासमी व संचालन साद सिद्दीकी ने किया।
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इस मौके पर मौलाना इमरान, मुफ्ती अहमद गौड़, मौलाना दिलशाद कासमी, सैयद अकील हुसैन, सरफराज राइन, हाजी रियाज महमूद, परवेज गौड़ सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।