पत्रकारो से वार्ता करती एडवोकेट फरह फैज
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सहारनपुर। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता एवं तीन तलाक के मामले की पैरवी करने वाली फरहा फैज ने आरोप लगाया है कि सब रजिस्ट्रार ने गैर कानूनी तरीके से उनकी संस्था का पंजीकरण निरस्त किया है। यह कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारी के इशारे पर की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना की गड़बड़ी के मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाले जाने पर उन पर दबाव बनाने के लिए सहायक रजिस्ट्रार को मोहरा बनाकर कार्रवाई कराई गई है।
अधिवक्ता फरहा फैज कोर्ट रोड स्थित एक प्रतिष्ठान में पत्रकारों से वार्ता कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 19 अक्तूबर को महिला एवं बाल विकास समिति का नवीनीकरण कराने के लिए आवेदन किया था और अभिलेख समेत पूरी प्रक्रिया के लिए एक माह का समय मांगा था, जो 18 नवंबर को पूरा हो रहा था। जिस पर सहायक रजिस्ट्रार ने शुल्क जमा कराने की अनुमति दे दी थी। उन्होंने शुल्क भी जमा करा दिया था।
अचानक पांच नवंबर को अधिवक्ता सुरेश दत्त त्यागी ने संस्था के नवीनीकरण पर आपत्ति दर्ज करा दी। यही नहीं पांच नवंबर को ही रजिस्ट्रार ने आपत्ति पर नोटिस तैयार करने के आदेश जारी किए। उसी दिन नोटिस तैयार किया गया, फिर उसी दिन नोटिस को भिजवा दिया गया। यह पूरी कार्रवाई मात्र दो घंटे में पूरी कर दी गई। जिससे यह पता चल रहा है कि दबाव में पूरी प्रक्रिया की गई। यही नहीं सहायक रजिस्ट्रार ने इसकी प्रतिलिपि जिलाधिकारी को भी की। जबकि जिलाधिकारी का सहायक रजिस्ट्रार के नोटिस से कोई लेना-देना नहीं होता।
सहायक रजिस्ट्रार द्वारा पांच नवंबर को जारी किए गए नोटिस में 15 दिन में अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। उन्हें 20 नवंबर तक अभिलेख प्रस्तुत करने थे, लेकिन सहायक रजिस्ट्रार ने दबाव के चलते 16 नवंबर को ही उनकी संस्था का पंजीकरण निरस्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की जनहित याचिका दायर करने के कारण प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में सहायक रजिस्ट्रार को मोहरा बनाकर कार्रवाई कराई गई है। अब वह इसके खिलाफ मंडलायुक्त के यहां अपील करेंगी।