मार्ग से गुजरती मिट्टी से भरी ट्रैक्टर ट्राली।
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सहारनपुर में एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) की रोक के बावजूद जिले में मिट्टी का खनन बे-रोकटोक जारी है। ज्यादातर खनन शहर से सटे इलाकों में हो रहा है, जहां जेसीबी के इस्तेमाल से धरती की कोख खाली की जा रही है।
इससे एक ओर जहां प्रदूषण फैल रहा है, वहीं दूसरी ओर कभी फसलों से लहलहाने वाले खेत अपनी उपजाऊ क्षमता खोते जा रहे हैं। साथ ही खेत बंजर होते जा रहे हैं।
पिछले करीब 15 साल से देहात कोतवाली क्षेत्र के पुरान कलसिया रोड से सटे इलाकों में मिट्टी का खनन जारी है। किसान रुपयों के लालच में अपने खेतों की मिट्टी बेच रहे हैं।
आलम यह है कि खनन करने वाले जेसीबी से खेतों की कोख को लगातार खाली कर रहे हैं। दिन-रात दर्जनों ट्रैक्टर और ट्रॉलियों के जरिये खेतों से मिट्टी उठाकर शहरों में भराव के लिए इस्तेमाल की जा रही है।
चार से आठ फुट गहरी मिट्टी उठने की वजह से खेत तालाबनुमा बन रहे हैं। साथ ही धरती बंजर होती जा रही है। दिनभर ट्रॉलियों के चलने से सड़क पर धूल के गुबार उड़ने से वायु प्रदूषण फैल रहा है।
सड़क के आसपास रहने वाले लोगों की धूल की वजह से हालत खराब है। साथ ही प्रदूषण भी फैल रहा है। सबसे बड़ी बात है कि एनजीटी ने प्रदूषण को देखते हुए मिट्टी के खनन पर रोक लगाई हुई है।
इसके बावजूद पुलिस या प्रशासन की ओर से मिट्टी के खनन को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। ओवरलोड वाहनों से टूट रही सड़कें ः सहारनपुर। मिट्टी से भरी ट्रॉलियों के दिन भर में सौ से अधिक चक्कर लगने से क्षेत्र की सड़कें ध्वस्त हो रही हैं।
ट्रॉलियों की वजह से पुराना कलसिया रोड की सड़क करीब दस साल तक टूटी रही। कुछ दिन पहले ही यह सड़क पुन: बनवाई गई है। मगर मिट्टी से भरी ट्रॉलियों के कारण फिर से टूटने लगी है। इसे लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी है।