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आईआईए ने भेजा नितिन गडकरी को ज्ञापन

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सहारनपुर। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की परिभाषा टर्न ओवर के आधार पर तय करने के विरोध में आईआईए ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन भेजा। उन्होंने कहा कि संस्था एमएसएमई की परिभाषा टर्नओवर आधारित करने के पक्ष में नहीं हैं।
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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज गुप्ता के निर्देश पर संस्था के स्थानीय चैप्टर की ओर से भेजे गए ज्ञापन में चेयरमैन रविंद्र मिगलानी ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश में 6.34 करोड़ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम हैं जो जीडीपी में 30 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं। साथ ही करीब 11.10 करोड़ लोगों को रोजगार इस सेक्टर में हैं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय, संसद के वर्तमान सत्र में एमएसएमई की परिभाषा को टर्न ओवर के आधार पर करने जा रही है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का टर्न ओवर कुछ लाख रुपयों से लेकर अधिकतम 75 करोड़ तक है। इसलिए 98 प्रतिशत उद्योगों को परिभाषा बदलने से कोई लाभ नहीं होगा, लेकिन 75 करोड़ से अधिक और 250 करोड़ रुपये तक के टर्न ओवर वाले उद्योग एमएसएमई सेक्टर से जुड़ जाएंगे। इसका लाभ बड़े उद्यमों को ही होगा। सरकारी खरीद में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए 25 प्रतिशत का आरक्षण है। इस आरक्षण का अधिकतम लाभ भी उच्च टर्न ओवर वाले उद्योग ले जाएंगे। इसका अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एमएसएमई सेक्टर के उद्यमों को निवेश के आधार पर अपनी श्रेणी के उच्चीकरण के लिए प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। इससे इस सेक्टर में न सिर्फ निवेश बढे़गा बल्कि रोजगार अधिक उत्पन्न होंगे। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि यदि सरकार एमएसएमई सेक्टर की परिभाषा को टर्नओवर के आधार पर ही रखना चाहती है तो टर्न ओवर की अधिकतम सीमा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए क्रमश: 5 करोड़, 25 करोड़, एवं 75 करोड़ रुपये से अधिक न हो। सेवा क्षेत्र के उद्यमों के लिए अधिकतम टर्न ओवर सीमा दो करोड़, 10 करोड़ एवं 50 करोड़ रुपये से अधिक न हो।
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