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मदद मिले तो चमके वुड कार्विंग कारोबार

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सहारनपुर। विश्वविख्यात वुड कार्विंग कारोबार पर कोरोना काल में बुरा प्रभाव पड़ा है। करीब 1500 करोड़ रुपये के टर्न ओवर वाले इस कारोबार पर मंदी की मार है। एक तरफ कच्चा माल नहीं मिल रहा है तो विदेशों को निर्यात के ऑर्डर भी प्रभावित हुए हैं। सवा महीने बाद कोरोना कर्फ्यू तो हट गया, लेकिन कारोबारियों की अभी भी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कारोबारियों को सरकारी सहायता की दरकार है।
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कोरोना संक्रमण के चलते लगे आंशिक कर्फ्यू का जनपद के वुड कार्विंग कारोबार पर विपरीत असर पड़ा है। इस कारोबार के लिए जरूरी पैकिंग मैटीरियल, लकड़ी और एमडीएफ (मीडियम डेनसिटी फाइबर) के रेट में करीब डेढ़ गुना बढ़ोतरी हो गई है। वहीं इसकी उपलब्धता भी अभी तक सुचारु नहीं हो सकी है। हस्तशिल्पियों की उपलब्धता भी पहले से कम है। इन समस्याओं के चलते वुड कार्विंग कारोबार ने अभी तक गति नहीं पकड़ी है। जिससे निर्यात के ऑर्डर भी प्रभावित हो रहे हैं।
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लकड़ी के साथ परिवहन भी सस्ता हो
वुड कार्विंग कारोबार के लिए जरूरी रॉ मैटीरियल के रेट बढ़ गए हैं। कंटेनर की उपलब्धता कम होने के साथ ही किराए में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। जिससे वुड कार्विंग के निर्यात पर बुरा असर पड़ रहा है। सरकार को रॉ मैटिरियल के साथ ही सस्ते परिवहन ( कंटेनर ) की व्यवस्था भी करानी चाहिए। -- रविन्द्र मिगलानी, चैप्टर चेयरमैन आईआईए एवं निर्यातक।
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कम ब्याज पर मिले ऋण
वुड कार्विंग उद्योग पर कोरोना संक्रमण का बुरा प्रभाव पड़ा है। इससे निर्यात ऑर्डर भी प्रभावित हुए हैं। आम और शीशम की लकड़ी की भी किल्लत है। कारोबार को गति पकड़ने में अभी समय लगेगा। सरकार को वुड कार्विंग कारोबारियों को सस्ती दर पर बैंक ऋण उपलब्ध कराना चाहिए। -- विवेक शर्मा, वुड कार्विंग कारोबारी।
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लकड़ी का डिपो स्थापित हो
कोविड के प्रकोप से कुछ निर्यात ऑर्डर पेंडिंग हैं और कुछ निरस्त होने के कगार पर हैं। लकड़ी की उपलब्धता अभी भी सुचारु नहीं हो पाई है। सरकार को जनपद में लकड़ी का डिपो स्थापित करना चाहिए। लकड़ी, शीशा, पैकिंग मैटीरियल सभी के रेट बढ़े हैं। इनके रेट को कंट्रोल किया जाए, तभी वुड कार्विंग उद्योग गति पकड़ेगा।
-- साजिद हन्फी, वुड कार्विंग कारोबारी एवं निर्यातक।
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कच्चे माल के भाव पर लगे अंकुश
कोरोना काल में कच्चे माल के भाव में काफी इजाफा हुआ है। इसके कारण विदेशी ग्राहकों और निर्यातकों के बीच सौदा नहीं पट रहा है। विदेशों में वुड कार्विंग उत्पादों की डिमांड काफी है। सरकार को कच्चे माल के भाव पर अंकुश लगाना चाहिए। -- परविन्दर सिंह, निर्यातक।
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----- एक नजर में वुड कार्विंग कारोबार
- 100 साल पुराना है वुडकार्विंग उद्योग
- 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय निर्यातक हैं
- 1300 मेन्युफैक्चर्स कारोबार करते हैं
- एक लाख से अधिक कारीगर इससे जुड़े हैं।
- 1500 करोड़ रुपये का है सालाना टर्नओवर
- 1000 करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात
- 35-35 फीसदी निर्यात अमेरिका और यूरोप में होता है
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