सहारनपुर। जनपद के जूता उद्योग तरक्की के लिए एक सामान्य सुविधा केंद्र (सीएफसी) की बेहद आवश्यकता है। सीएफसी बनने से न सिर्फ जूताें की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि लागत में भी कमी आएगी। इसके लिए सुगत सोशल वैलफेयर सोसायटी से जुड़े उद्यमी लंबे समय से प्रयासरत हैं।
जनपद में जूता उद्योग लगभग करीब सौ वर्ष पुराना है। यहां पर करीब पांच सौ इकाइयों में जूते बनाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश इकाइयां कुटीर उद्योग हैं। इनका वार्षिक कारोबार करीब 100 से 125 करोड़ रुपये का है और लगभग दस हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है। अधिकांशतया जूतों का निर्माण परंपरागत तरीके से ही हो रहा है। उन्नत तकनीक के अभाव में यहां तैयार जूते बड़े ब्रांडों से मुकाबला नहीं कर पाते हैं।
परंपरागत तरीके से जूता बनाने से न सिर्फ लागत बढ़ती है, बल्कि उत्पाद का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता। सीएफसी के लिए सुगत सोशल वेलफेयर सोसायटी ने कई वर्ष पहले सीएफसी बनाने की कवायद शुरू की थी। इसके लिए उन्हें 2021 में सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है लेकिन अभी तक उनका प्रयास धरातल पर नहीं उतर सका है।
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जूता उद्योग को मिलेंगी सुविधाएं
सोसायटी द्वारा प्रस्तावित सामान्य सुविधा केंद्र में नवीनतम तकनीक युक्त मशीनें लगाई जाएंगी। जिससे जूते की नवीनतम डिजाइनिंग, सिलाई, लास्टिंग आदि का प्रबंधन बेहतर हो सकेगा। इससे उद्यमी कम रेट पर अपना काम आधुनिक मशीनों से करा सकेंगे। इससे जूतों की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
कई स्थानों पर स्थापित हैं छोटी इकाईयां
यहां पर कई स्थानों पर जूता बनाने का अधिक काम होता है। इसमें शारदा नगर, रामघाट, जेल चुंगी, शेखपुरा, इंदिरा काॅलोनी जाटव नगर, आदर्श नगर, किशनपुरा, मैदा मिल फाटक आदि क्षेत्र शामिल हैं। यहां पर घरों और छोटी इकाइयों में कारीगर जूता बनाने का काम करते हैं।
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सोसायटी को जूते का सामान्य सुविधा केंद्र बनाने के लिए वर्ष 2021 में सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। इसके बावजूद अभी तक यह धरातल पर नहीं उतर सका है। जनपद में करीब दस हजार लोग इससे जूता उद्योग से जुडे हुए हैं। - प्रवीण कर्दम, अध्यक्ष, सुगत सोशल वैलफेयर सोसायटी
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अभी जूते के सामान्य सुविधा केंद्र बनाने के लिए मुख्यालय से बजट नहीं मिला है। बजट मिलते ही इसका निर्माण कराया जाएगा। - वीके कौशल, उपायुक्त उद्योग