सहारनपुर में आमों की मिठास के लिए दुनिया भर में अलग पहचान बनाने वाले सहारनपुर के चौसा और दशहरी को पाकिस्तानी आमों से सीधी टक्कर मिलने लगी है।
पाकिस्तान के आम ज्यादा पीले और सुंदर होने के कारण विदेशों में ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। यही कारण है कि सहारनपुर से एक्सपोर्ट होने वाले नवाब ब्रांड के लंगड़ा, दशहरी और चौसा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
कई देशों में अपने स्वाद के लिए मशहूर सहारनपुर के चौसा और दशहरी पर पाकिस्तानी आम भारी पड़ रहे हैं। जिस सीजन में इन आमों का एक्सपोर्ट शुरू होता है, उसी दौर में पाकिस्तान से भी चौसा और दशहरी विदेशों में भेजा जाता है।
सहारनपुर सहित यूपी के नवाब ब्रांड के दशहरी और चौसा की पहचान विदेशों में खुशबू और स्वाद के लिए है। मगर, पाकिस्तानी आम दिखने में ज्यादा चमकदार और यहां की आमों की अपेक्षा ज्यादा पीले होने के कारण विदेशों में खूब पसंद किए जाते हैं।
यही कारण है कि विदेशों में पाकिस्तानी आमों की आवक शुरू होने के साथ ही यहां के चौसा, दशहरी की मांग कम हुई है। आपको बता दें कि सहारनपुर से नवाब ब्रांड से बड़े पैमाने पर आम का निर्यात किया जाता है।
पिछले साल 306 टन आम का निर्यात किया गया था। एक्सपोर्ट क्वालिटी आम के लिए पहला मानक उसका 250 से 300 ग्राम का होना होता है।
उधर, अांधी में एक्सपोर्ट क्वालिटी के मानक को पूरा करने वाले बड़े आमों के गिरने से निर्यात योग्य आम नहीं मिल रहे हैं। उम्मीद है कि सप्ताह या 10 दिन में एक्सपोर्ट साइज का आम मिलेगा।
अब भले ही भारत सहित कई देशों में अपने स्वाद के चलते लंगड़ा आम लोगों की पहली पंसद है। मगर, यूरोप में अपने रंग के चलते उसे पंसद नहीं किया जा रहा है। लंगड़ा आम पूरी तरह पकने के बाद भी हरा होता है। ऐसे में यूरोप में इसे पसंद ही नहीं किया गया।
मैंगो पैक हाउस से आम का निर्यात करने वाले हरजीत सिंह ढिल्लन का कहना है कि शुरुआती दौर में गुजराती केसर और अल्फांसों का एक्सपोर्ट होता है। उस वक्त पाकिस्तानी आम शुरू नहीं होते।
मगर, चौसा और दशहरी के समय पाकिस्तानी आम भी एक्सपोर्ट होते हैं। स्वाद में हमारे आम का कोई तोड़ नहीं है। मगर, वहां के आम ज्यादा पीले और दिखने में अच्छे होते हैं। यही कारण है कि यहां से एक्सपोर्ट होने वाले आम की खरीद प्रभावित होती है।