नानौता के भारी गांव स्थित जिला पंचायत की गोशाला। संवाद
सहारनपुर। हिंदू समाज ने मुझे गोमाता का दर्जा दिया है, गोमाता यानी मां के समान। हर तीज-त्योहार पर मुझे पूजा जाता है। सुबह-शाम पहली रोटी मेरे लिए निकाली जाती है, लेकिन आज मेरे भूख से मरने की नौबत आ गई है। जिले के आला हाकिम भी प्रयासरत हैं कि मुझे भूखे मरने से बचाया जा सके, लेकिन मेरे बच्चों ये आपके प्यार और दुलार की परीक्षा है, क्या मेरे लिए चारे का बंदोबस्त कर पाओगे? फिलहाल कुछ ऐसी ही मार्मिक अपील है जिले की गोशालाओं में संरक्षित गोवंश की।
जिले भर में 19 स्थाई और अस्थाई गोशालाएं संचालित हैं। मौजूदा समय में यहां पर करीब 3308 गोवंश संरक्षित है। गोवंश को चारे की समस्या न हो, इसके लिए छह माह का भूसा एवं चारा स्टोर कर के रखा जाता है। गेहूं कटाई का सीजन जारी है, ऐसे में भूसा बाजार में उपलब्ध है। कुछ गोशालाओं में भूसा है तो कुछ ऐसी है कि जिनमें मात्र कुछ क्विंटल ही भूसा बचा हुआ है। अभी तक किसानों ने 3339 क्विटंल भूसा विभिन्न गोशालाओं को दान में दिया है। विभाग ने दान में भूसा प्राप्त करने का लक्ष्य 5484 क्विंटल रखा है, जिससे सभी गोवंश का पेट भर सके। अब जिला प्रशासन की तरफ से अपील की गई है कि सांसद, विधायक, ब्लॉक प्रमुख आदि भूसा दान करें।
- - जिले की गोशालाओं में संरक्षित गोवंश
गोशालासंरक्षित गोवंश-दान भूसा(क्विंटल)
कलसी-115163
गुनासा170240
गढौला142-414
सलूनी-93-112
भैंसराऊ123-205
सरसीना132164
भारी दिनारपुर-156-0.0
टिकरौल-14687
बहादरपुर-5045
नंदपुर-118237
कलसिया-156291
नवादा भजडू18147
ढाल्ला माजरा-170341
शब्बीरपुर154-181
खानपुर अफगान तीतरो328-159
कलसिया-243-55
सदर गोशाला-58550
नारायणपुर148138
चिलकाना-120-108
आमजन से अपील है कि गोशालाओं में अधिक से अधिक भूसा दान करें, जिससे गोवंश के सामने भूसा का संकट न हो। - मनीष बंसल, जिलाधिकारी