सहारनपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बंद किए गए ब्लड बैंकों से खून जिला अस्पताल में भेजने के निर्देश दिए थे। निजी ब्लड बैंक बंद हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक ब्लड अस्पताल नहीं भेजा गया है। निजी ब्लड बैंकों में रखे सैकड़ों यूनिट खून को बेचने या फिर खराब होने की आशंका है। इसमें विभागीय लापरवाही भी उजागर हो रही है।
दो अप्रैल को लखनऊ से गठित खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की अंतरजनपदीय टीम ने जिले में बालाजी, सुधार जन कल्याण, रिद्धि, शहीद भगत सिंह, सिद्धि और जीवन धारा चैरिटेबल ब्लड केंद्रों पर छापा मारा था। इन केंद्रों पर भारी अनियमितता पाई गई थी। यहां पर न तो खून देने-लेने वाले का कोई रिकॉर्ड मिला था और न ही एलाइजा टेस्ट पाया गया। बिना परीक्षण रिकॉर्ड के रक्त को ट्रांसफर किया जा रहा था। कमियां मिलने पर इन सभी केंद्रों के संचालन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने आदेश दिए थे कि जिन ब्लड बैंकों को बंद किया गया है वहां से ब्लड को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में भेजा जाए, ताकि खून की बर्बादी न हो पाएं।
इसके बावजूद बंद ब्लड बैंक से जिला अस्पताल में अभी तक एक भी यूनिट नहीं पहुंचा है। जिला अस्पताल में ब्लड को तभी लेगा, जब उसकी एक्सपायरी कम से कम 10 दिन बाद होगी। इससे पहले एक्सपायर होने वाले खून को नहीं लेगा। जो ब्लड जिला अस्पताल में आएगा, उसकी जांच में समय लगेगा। बंद ब्लड बैंकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। न अधिकारी गंभीरता दिखा रहे हैं और न ही ब्लड बैंक संचालक।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड 153 यूनिट
एसबीडी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रविवार तक 153 यूनिट ब्लड था। इसमें ए पॉजिटिव 27, बी पॉजिटिव 51, एबी पॉजिटिव 28 और ओ पॉजिटिव 33 था। इसी तरह ए निगेटिव पांच, बी निगेटिव चार, एबी निगेटिव एक और ओ निगेटिव ग्रुप का चार यूनिट ब्लड बचा है। ब्लड बैंक से रोजाना थैलेसीमिया, सड़क हादसे के घायलों, गर्भवती महिलाओं को ब्लड की जरूरत पड़ती है।