तीतरो/ साढ़ौली/बड़गांव (सहारनपुर)। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पिछली योजनाओं में जिले के बहुत से गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) घोषित किया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के कारण प्रयोग लायक नहीं रहे हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। बहुत ऐसे भी हैं, जहां शौचालय तो बना दिए गए, लेकिन उनके गड्ढे आज तक नहीं बनाए जा सके हैं। ऐसे में ग्रामीण इनका इस्तेमाल उपले या भूसा भरने में कर रहे हैं। इसके चलते सरकार की स्वच्छता की मुहिम को पलीता लग रहा है।
सुविधा शुल्क देकर बना शौचालय एक साल में खराब
तीतरो क्षेत्र के बहलोलपुर गांव में बनाए गए 104 शौचालयों में से ज्यादातर खराब पड़े हैं। इस कारण संबंधित परिवार के सदस्य खुले में शौच करने जाते हैं। गांव के रणधीर पुत्र जयपाल का कहना है कि उसने कर्ज पर छह हजार रुपये लेकर शौचालय निर्माण के लिए सुविधा शुल्क दिया था, जो शौचालय विभाग द्वारा बनवाया गया था, वह एक साल में ही खराब हो गया। शीट नीचे धंस गई और दीवारों का प्लास्टर भी उतर गया। एक शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये अवमुक्त किए गए थे।
इस्तेमाल लायक न होने से ग्रामीणों ने भरे उपले
गंगोह ब्लाक का महंगी गांव ओडीएफ घोषित है, परंतु ज्यादातर शौचालयों का उपयोग नहीं हो रहा है। लाभार्थियों ने शौचालय के अंदर उपले भर रखे हैं। गांव के बिरज पाल, सतीश, महेंद्र सिंह आदि ग्रामीणों कहना है कि मानकों के अनुसार निर्माण सामग्री न लगने से शौचालय क्षतिग्रस्त हो गए। इनकी दीवारों में दरार आ गई हैं, ऐसे में इनमें शौच करना जोखिम भरा है। हालांकि मंहगी के तत्कालीन ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि बलजीत सिंह का कहना है कि लाभार्थियों की देखरेख के अभाव में ही शौचालय निष्क्रिय हुए हैं। सरकार से प्राप्त पूरी धनराशि लाभार्थियों को दी गई है।
दो साल पूर्व शौचालय बना, गड्ढा आज तक नहीं बना
साढ़ौली कदीम निवासी सुखपाल ने बताया कि शौचालय का निर्माण आज तक मानकों के अनुसार पूरा नहीं हो पाया है। न गड्ढा बनाया गया और न ही प्लास्टर कार्य पूरा किया गया। हैरत की बात यह है कि बीडीओ कार्यालय इससे मात्र 200 मीटर की दूरी पर है और कोई जांच तक को नहीं पहुंचा। शौचालय अधूरा होने के चलते वह इसे इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसी ब्लाक के गांव चक खीजरपुर निवासी दर्शन लाल ने बताया कि दो वर्ष पूर्व शौचालय तो बन गया था। उस वक्त बाद में गड्ढा बनाने की बात कही थी, लेकिन आज तक इसे नहीं बनाया गया। ऐसे में खेतों की तरफ शौच के लिए जाना मजबूरी है।
दो साल में जर्जर हुआ शौचालय, अपने पैसे से करा रहे मरम्मत
नानौता विकास खंड अंतर्गत बड़गांव समेत बालू माजरा, बड़ूली नयागांव, दल्हेड़ी, कातला, झबीरन, चिराऊ, मुश्कीपुर, नन्हेड़ा आदि ओडीएफ घोषित हो चुके गांवों में शौचालय या तो अधूरे पड़े हैं या फिर कुछ जर्जर होकर धराशाई हो चुके हैं। इसके चलते ग्रामीण खुले में शौच को जाने के लिए विवश हैं। गांव बडूली नया गांव निवासी मोनू ने बताया उसका शौचालय 2018-19 में बना था जो दो साल के अंदर ही गिरने के कगार पर पहुंच गया। उसे अब अपने पैसे से मरम्मत करानी पड़ रही है।