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कितनी हैं अवैध कॉलोनियां और निर्माण, अधिकारी अंजान

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मल्हीपुर रोड स्थित अवैध कॉलोनी - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। अवैध कॉलोनियों और निर्माणों पर अंकुश लगाने का जिम्मा जिस विभाग पर है, उसके अधिकारियों को ही मालूम नहीं है कि शहर में कितनी अवैध कॉलोनियां हैं। इससे भी हैरानी वाली बात यह है कि वर्ष 2005 के बाद यानी बीते 14 साल से अवैध कॉलोनियों की कोई सूची तैयार नहीं की गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध कॉलोनियों और निर्माणों को लेकर विकास प्राधिकरण के अधिकारी कितने गंभीर हैं।
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विकास प्राधिकरण ने अपने कार्यक्षेत्र को 12 जोन में बांटा हुआ है। प्रत्येक जोन में एक सहायक और एक अवर अभियंता के साथ ही एक लिपिक और मेट भी है। मेट और अभियंताओं की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने क्षेत्रों में चल रहे अवैध निर्माणों और अवैध कॉलोनियों पर नजर रखें तथा उनको नियमित कराएं, जिससे प्राधिकरण को राजस्व प्राप्त हो। मगर विकास प्राधिकरण की कहानी कुछ और ही चल रही है। वर्तमान में शहर में कितनी अवैध कॉलोनियां कट रही हैं इस संबंध में जब एक्सईएन एके मिश्रा से बात हुई तो उन्होंने कहा कि संबंधित लिपिक जिले सिंह के पास अवैध कॉलोनियों की पूरी लिस्ट है। जिले सिंह से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि 2005 के बाद अवैध कॉलोनियों की कोई लिस्ट तैयार नहीं की गई है। यह स्थिति तब है, जबकि शहर के चारों ओर अवैध कॉलोनियां कट रहीं हैं।
इन मार्गों पर हैं अवैध कॉलोनियां
वैसे तो पूरे शहर में अवैध कॉलोनियां काटी जा रहीं हैं, मगर जिन मार्गों पर अधिक कॉलोनियां काटी जा रही हैं। उनमें शकलापुरी मार्ग, बेहट रोड, देहरादून रोड, जनता रोड पर तो कॉलोनियों के साथ ही फ्लैट भी बनाए जा रहे हैं। नवादा रोड, गलीरा रोड, मानकमऊ क्षेत्र, अंबाला रोड, देहरादून रोड, दिल्ली रोड, पेपर मिल रोड और मल्हीपुर रोड शामिल है।
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कार्यवाहकों के भरोसे विकास प्राधिकरण
विकास प्राधिकरण प्रमुख विभागों में से एक है, लेकिन प्राधिकरण में स्थाई अधिकारी ही नहीं हैं। नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह के पास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का अतिरिक्त चार्ज है, जिसमें वह पूरा समय नहीं दे पाते हैं, क्योंकि उन पर नगर निगम के साथ ही स्मार्ट सिटी की भी जिम्मेदारी है। इसके अलावा अपर आयुक्त डीपी सिंह पर प्राधिकरण के सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार है। सचिव पद बीते करीब डेढ़ साल से खाली है। डीपी सिंह से पहले विजय शुक्ला इस पद पर कार्यवाहक के तौर पर रहे।
अवैध कॉलोनियों की सूची बनाने की जिम्मेदारी लिपिक की है। लिपिक ने जो बात कही है कि 2005 के बाद सूची नहीं बनी है वह गलत है। मेरे ख्याल से 2008 के बाद सूची नहीं बनी है। मगर ऐसा नहीं है कि अवैध कॉलोनियों पर हमारी नजर नहीं है। प्रत्येक जोन के अधिकारियों के पास अपने-अपने जोन की सूची रहती है।
एके मिश्रा, एक्सईएन, विकास प्राधिकरण।
अवैध कॉलोनियों की एक सूची होनी चाहिए, जो तैैयार नहीं की गई है। सभी जोन के जिम्मेदार लोगों से सूची लेकर एक फाइनल लिस्ट तैैयार कराई जाएगी, साथ ही अभियान चलाकर अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
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डीपी सिंह, कार्यवाहक सचिव, विकास प्राधिकरण।

रामनगर स्थित अवैध कॉलोनी- फोटो : SAHARANPUR

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